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बजट सत्र 2026 से पहले सर्वदलीय बैठक, राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी सत्र की शुरुआत, सरकार ने सभी दलों से मांगा सहयोग

Written by:Shyam Dwivedi
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संसद के आगामी बजट सत्र 2026 की आहट के साथ ही देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई। 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण से सत्र की शुरूआत होगी।
बजट सत्र 2026 से पहले सर्वदलीय बैठक, राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी सत्र की शुरुआत, सरकार ने सभी दलों से मांगा सहयोग

संसद के आगामी बजट सत्र 2026 की आहट के साथ ही देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए। वहीं कांग्रेस के जयराम रमेश, कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, डीएमके के टी आर बालू, बीजेडी के डॉ. सस्मित पात्रा, AIADMK के एम. थंबी दुराई, NCP (SP) के फोजिया खान समेत विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए।

राष्ट्रपति के अभिभाषण से सत्र की शुरूआत

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बैठक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज बैठक में उपस्थित सांसदों ने कई सुझाव दिए हैं जिसे हमने नोट किया है। हमने अपील की है कि ये साल का पहला सत्र है। 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण से सत्र की शुरूआत होगी। बुधवार को 11 बजे संयुक्त सत्र तय किया गया है।

उन्होंने बताया कि 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा और 1 फरवरी को बजट पेश होगा। सत्र का पहला भाग राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव होगा। उस पर चर्चा होगी। फिर बजट पर सदन में चर्चा होगी। हमने सबसे विनती की है सभी पार्टियां सहयोग करें और सदन को सुचारु रूप से चलाने में योगदान करें।

सत्र में SIR पर चर्चा होगी या नहीं?

केंद्रीय मंत्री ने SIR मुद्दे पर कहा कि मैं रिकॉर्ड बिल्कुल स्पष्ट रखना चाहता हूँ। पिछली बार सभी विपक्षी दलों ने SIR पर चर्चा की मांग की थी, जिसके बाद सरकार ने चर्चा के दायरे को विस्तृत किया था। उस समय चुनाव सुधारों पर व्यापक चर्चा हुई थी, जिसमें SIR का विषय भी शामिल था। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में इस पर विस्तृत और लंबी चर्चा हुई थी। सभी सदस्यों को पर्याप्त समय दिया गया था और दलों ने उपलब्ध समय का पूर्ण उपयोग करते हुए अपनी पूरी ऊर्जा के साथ इस विषय पर अपनी बात रखी थी। ऐसे में यदि पुनः एक और चर्चा की माँग की जाती है, तो वह आवश्यक नहीं प्रतीत होती, क्योंकि इस विषय पर पहले ही विस्तार से विचार-विमर्श किया जा चुका है।

किरेन रिजिजू ने कहा कि नियमों के अनुसार, चर्चा केवल बजट के संदर्भ में ही की जानी चाहिए। सरकार सदैव किसी भी सुझाव को सुनने और उस पर विचार करने के लिए तत्पर रहती है। सरकार की ओर से सभी सदस्यों से यह अपेक्षा है कि हमारी संसदीय लोकतंत्र में हमें बोलने, जनता का प्रतिनिधित्व करने और जनता के हित में अपनी बात रखने के लिए चुना गया है। इसलिए, अपने अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग करते हुए हमारा यह भी कर्तव्य है कि हम अन्य राजनीतिक दलों के सदस्यों की बात भी ध्यानपूर्वक सुनें, ताकि हमारी संसदीय लोकतंत्र पूरी जीवंतता और प्रभावशीलता के साथ संचालित होती रहे।

बजट सत्र को लेकर विपक्ष की तैयारी

बता दें कि बजट सत्र को लेकर विपक्ष ने पूरी तैयारी कर ली है। इस बार कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई है। ऐसा माना जा रहा है कि संसद के बजट सत्र में मनरेगा, मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा।

1 फरवरी को पेश होगा बजट

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर दो अप्रैल तक चलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण और आम बजट पेश करेंगी। संसदीय परंपरा के मुताबिक, इस बार भी बजट 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा। इस बार एक फरवरी रविवार को है। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा।