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भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सोमवार से शुरू होगी अंतिम दौर की वार्ता, इन मुद्दों पर टिकी सभी की निगाहें

Written by:Ankita Chourdia
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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार से चार दिवसीय महत्वपूर्ण वार्ता शुरू हो रही है। दरअसल टैरिफ समेत कई अहम मुद्दों पर इस दौरान चर्चा होगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सोमवार से शुरू होगी अंतिम दौर की वार्ता, इन मुद्दों पर टिकी सभी की निगाहें

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार से राजधानी दिल्ली में चार दिवसीय महत्वपूर्ण वार्ता का दौर शुरू होने जा रही है। दरअसल दोनों प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच लंबे समय से चल रही इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य एक द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते या एक अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को कानूनी जामा पहनाना है। यह बैठक दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

दरअसल इस उच्च स्तरीय वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जो व्यापारिक समझौतों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वहीं, भारत की ओर से वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन मुख्य वार्ताकार की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण बातचीत 1 जून से शुरू होकर 4 जून तक चलेगी, जिसमें दोनों पक्ष गहन विचार-विमर्श करेंगे।

इन मुद्दों पर होगी विस्तार से चर्चा

वहीं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के लिए व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से बातचीत करेंगे। इनमें बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे, गैर-टैरिफ उपाय, सीमा शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं का सरलीकरण, व्यापार और व्यवसाय सुगमता, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसर और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। इन सभी पहलुओं पर गहन मंथन किया जाएगा।

इससे पहले, 7 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी किया था, जिसने इस व्यापारिक समझौते की नींव रखी थी। उस बयान में द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते या एक अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा या ढांचे को अंतिम रूप दिया गया था। अब, वर्तमान वार्ता का लक्ष्य उस सैद्धांतिक सौदे को कानूनी रूप से बाध्यकारी स्वरूप देना है। इस ढांचे ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की थी और भविष्य के सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया था।

टैरिफ पर मिल सकती है भारत को राहत?

दरअसल फरवरी में तय किए गए ढांचे के अनुसार, अमेरिका ने भारत में लगने वाले कुछ टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर अपनी सहमति जताई थी। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका ने इससे पहले रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया था। उस समय समझौते के तहत इस 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित था।

वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी व्यापार नीति में हालिया बदलाव भी इन वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। 20 फरवरी को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया था। ये टैरिफ 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट के तहत लगाए गए थे। इसके ठीक बाद, 24 फरवरी को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसने वैश्विक व्यापार जगत में चिंता बढ़ा दी थी। इन्हीं सभी जटिल व्यापारिक चर्चाओं को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच एक स्थायी और लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका का एक उच्च स्तरीय दल 1 जून से 4 जून तक भारत में मौजूद रहेगा, जो इन मसलों पर गहन विचार-विमर्श करेगा।

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