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CJI सूर्यकांत ने CEC की नियुक्ति वाले कानून पर सुनवाई से खुद को किया अलग, जानें क्यों लिया ये फैसला

Written by:Gaurav Sharma
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने हितों के टकराव की आशंका जताते हुए यह फैसला लिया और कहा कि मामले को ऐसी बेंच के पास भेजा जाएगा जिसमें कोई भावी CJI न हो।
CJI सूर्यकांत ने CEC की नियुक्ति वाले कानून पर सुनवाई से खुद को किया अलग, जानें क्यों लिया ये फैसला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े नए कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई एक बार फिर टल गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने इसका कारण हितों के टकराव की संभावित आशंका को बताया है।

यह कानून दिसंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसने चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया था। इसी प्रावधान के कारण CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि वह इस मामले की सुनवाई करते हैं, तो उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या सुझाव दिया?

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि मामले को किसी ऐसी बेंच को सौंपा जाना चाहिए जिसमें कोई भी न्यायाधीश भविष्य में CJI बनने की कतार में न हो। उन्होंने बताया कि बेंच में शामिल जस्टिस बागची और जस्टिस पंचोली, दोनों ही भविष्य में CJI बनने वाले हैं।

“मेरी राय में सबसे अच्छा यही होगा कि इसे ऐसी बेंच के पास भेजा जाए जिसमें कोई भावी CJI न हो।”- प्रशांत भूषण, वकील

इस सुझाव पर सहमति जताते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा, “मुझे इस मामले को ऐसी बेंच के पास भेजना चाहिए, जिसमें शामिल जज CJI बनने की कतार में न हों। तब कोई भी कुछ नहीं कह पाएगा।”

अब कब होगी मामले की सुनवाई?

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल, 2026 की तारीख तय की है। इस मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन किया जाएगा, जिसके सदस्यों का फैसला बाद में होगा। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि मामले की सुनवाई पूरी तरह से निष्पक्ष हो और इस पर किसी भी तरह के पूर्वाग्रह का आरोप न लगे।

क्या था पुराना नियम और नया कानून?

दिसंबर 2023 में संसद द्वारा पारित चुनाव आयुक्त अधिनियम ने नियुक्ति प्रक्रिया को बदल दिया। इससे पहले, मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। उस फैसले में कहा गया था कि जब तक संसद कोई कानून नहीं बना लेती, तब तक CEC और ECs की नियुक्ति एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा की जाएगी।

इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया गया था। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चुनाव आयोग की नियुक्तियां कार्यपालिका के प्रभाव से मुक्त और स्वतंत्र हों। हालांकि, सरकार द्वारा लाए गए नए कानून में CJI की जगह एक कैबिनेट मंत्री को चयन समिति में शामिल कर लिया गया, जिसे लेकर विवाद जारी है।

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