यूनेस्को से अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता मिलने के बाद दुर्गा पूजा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार पर केंद्र सरकार ने लोकसभा में विस्तृत जानकारी दी है। यह जानकारी BJP सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो के सवाल के जवाब में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रखी।

महतो ने पूछा था कि केंद्र ने दुर्गा पूजा को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए हैं, क्या इसके लिए अलग से धनराशि तय की गई है, और क्या भारतीय दूतावासों, सांस्कृतिक संस्थानों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय किया गया है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पश्चिम बंगाल के दुर्गा पूजा समारोहों में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए क्या विशेष पर्यटन रणनीति पर काम हो रहा है।

2023 में रिसर्च और डॉक्यूमेंटेशन के लिए 22.29 लाख रुपये

मंत्री ने जवाब में कहा कि संस्कृति मंत्रालय की वैश्विक जुड़ाव योजना के तहत दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए संबंधित संस्थाओं को अनुदान दिया जाता है। उनके अनुसार, वर्ष 2023 में यूनेस्को के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत ढांचे के तहत नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी दुर्गा पूजा की रिसर्च और डॉक्यूमेंटेशन गतिविधियों के लिए 22,29,244 रुपये आवंटित किए गए।

सवाल का एक हिस्सा इस बात से भी जुड़ा था कि क्या दुर्गा पूजा के ऐतिहासिक, कलात्मक और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने के लिए परियोजनाएं शुरू हुई हैं। सरकार की तरफ से दी गई जानकारी में डॉक्यूमेंटेशन और रिसर्च पर खर्च का विवरण इसी संदर्भ में रखा गया।

टोक्यो और लाल किला कार्यक्रमों का उल्लेख

जवाब में हाल की अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों का भी जिक्र किया गया। मंत्री ने बताया कि सितंबर 2025 में संगीत नाटक अकादमी (SNA) ने टोक्यो में भारतीय बंगाली समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले इप्पन शादान हाउजिन इंडोजिनो त्सुदोई के साथ दुर्गा पूजा समारोह का एक वीडियो साझा किया था।

इसके बाद 8 से 13 दिसंबर 2025 के बीच दिल्ली के लाल किले में आयोजित अंतरसरकारी समिति की बैठक के दौरान भी दुर्गा पूजा परंपरा का प्रदर्शन हुआ। सरकार के अनुसार, वहां 190 से अधिक सहभागी देशों के प्रतिनिधियों और यूनेस्को अधिकारियों के समक्ष पारंपरिक धुनुची नाच प्रस्तुत किया गया।

पर्यटन और वैश्विक प्रस्तुति पर सरकार का रुख

सरकार ने यह भी कहा कि यूनेस्को मान्यता प्राप्त दुर्गा पूजा को बढ़ावा देने के लिए अपने असम्भव भारत 2.0 अभियान का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसमें विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज और सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल किए गए हैं।

लोकसभा में उठे सवालों से यह स्पष्ट हुआ कि मुद्दा केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन, दस्तावेजीकरण, संस्थागत सहयोग और वैश्विक मंचों पर प्रस्तुति—इन सभी को साथ लेकर नीति बनाई जा रही है। फिलहाल सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों में 2023 की आवंटित राशि और 2025 के कार्यक्रमों का ब्यौरा प्रमुख रूप से सामने आया है।