पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद को मतदान प्रक्रिया से अलग कर लिया है। उन्होंने 21 मई को होने वाली वोटिंग से ठीक पहले यह फैसला लिया है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से दिग्बांशु पांडा और सीपीआईएम (CPIM) के शंभु कुर्मी मैदान में हैं।
दरअसल जहांगीर खान ने अपने इस फैसले के पीछे निजी कारण बताए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने 2026 के विधानसभा उपचुनाव से अपना नाम वापस ले लिया है। उनके अनुसार, यह फैसला फाल्टा के विकास और जनहित के लिए लिया गया है, खासकर मुख्यमंत्री के विशेष पैकेज के बाद उन्होंने फाल्टा की प्रगति के प्रति अपनी पूरी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की और ‘जय हिंद, जय फाल्टा’ का नारा दिया।
भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी
वहीं इधर, जहांगीर खान के इस कदम पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता डॉ. सुभाष सरकार ने कहा कि खान ने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि वे समझ गए हैं कि जनता का समर्थन भाजपा के साथ है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा, “अभिषेक जी अगर आपमें हिम्मत है तो आइए और फाल्टा में टीएमसी को जीत दिलाइए।” सरकार ने इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और भ्रष्टाचार की हार करार दिया।
कई लोग ‘पुष्पा’ बनने की कोशिश करते हैं: राज्य मंत्री मजूमदार
वहीं, इस पूरे मामले पर केंद्रीय राज्य मंत्री मजूमदार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कई लोग ‘पुष्पा’ बनने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस बार ‘पुष्पा फुस्स हो गया है’। मजूमदार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ये सभी ‘पुष्पा’ और उनके बॉस डायमंड हार्बर में पहले तस्वीरें लगी होती थीं जिन पर लिखा होता था ‘AB झुकेगा नहीं’। अब हर कोई झुक रहा है। उन्होंने आगे कहा, “AB का एजेंट अब झुक गया है। आने वाले समय में AB भी झुकेगा। चिंता मत करो।”
जानिए तृणमूल कांग्रेस ने इसपर क्या कहा?
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले को जहांगीर खान का निजी निर्णय बताया है, न कि पार्टी का। टीएमसी ने आरोप लगाया कि 4 मई को चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से अकेले फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में उनकी पार्टी के 100 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। पार्टी ने यह भी कहा कि दिन-दहाड़े डरा-धमकाकर पार्टी के कई दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई, उन्हें बंद कर दिया गया और उन पर जबरन कब्जा कर लिया गया। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग (EC) पर भी आंखें मूंदने का आरोप लगाया, बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। टीएमसी ने अपने बयान में कहा कि इतने दबाव के बावजूद, उनके कार्यकर्ता चट्टान की तरह अडिग हैं और एजेंसियों तथा प्रशासन के जरिए भाजपा की तरफ से फैलाए जा रहे डर का लगातार विरोध कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग आखिरकार इस दबाव के आगे झुक गए और उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर लिया। टीएमसी ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बांग्ला विरोधी भाजपा के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी, फिर चाहे वह पश्चिम बंगाल में हो या दिल्ली में।
गौरतलब है कि धांधली के आरोप में टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने जहांगीर खान के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) पर 26 मई तक के लिए रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश दिया था।






