चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर में हनुमान जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। आज श्री हनुमान के जन्मोत्सव पर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और “जय बजरंगबली” के जयकारों से वातावरण गूंज रहा है।

हनुमान जी को बल, बुद्धि, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। रामायण में वर्णित उनकी भूमिका सिर्फ एक योद्धा की नहीं बल्कि एक आदर्श भक्त की भी है जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्री राम की सेवा में समर्पित कर दिया। श्री हनुमान जी वायु देवता के पुत्र हैं, इसलिए उन्हें पवनपुत्र, मारुति और अंजनीपुत्र भी कहा जाता है। उनकी माता अंजना और पिता केसरी थे। रामायण काल में वे भगवान श्री राम के परम भक्त, दूत और सहायक बने। वे रुद्रावतार यानी भगवान शिव का अंश माने जाते हैं।

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर

श्री हनुमान का उनका जीवन सिखाता है कि सच्ची भक्ति, विनम्रता, वचनबद्धता और संकट के समय साहस कैसे रखना चाहिए। वे संकटमोचन के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि जो उनके नाम का जाप करता है, उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हनुमान जी को चिरंजीवी भी कहा जाता है जिसका अर्थ है कि वे आज भी सशरीर विद्यमान हैं और राम नाम का जाप करने वाले भक्तों की रक्षा करते हैं।

क्या हैं आठ सिद्धि और नौ निधि

हनुमान जी असीम शक्ति के स्वामी ही नहीं  बल्कि वे अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के भी स्वामी हैं। हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध पंक्ति “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता” में बताया गया है कि श्री हनुमान को माता सीता द्वारा ऐसा वरदान प्राप्त हुआ कि वे अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियां (आठ दिव्य शक्तियां) और नौ निधियां (समृद्धि के रूप) प्रदान कर सकते हैं। आइए जानते हैं ये अष्ट सिद्धि और नौ निधियां क्या है।

अष्ट सिद्धि (आठ दिव्य शक्तियां)

अष्ट सिद्धियां मार्कण्डेय पुराण आदि ग्रंथों में वर्णित हैं। ये शरीर, मन और प्रकृति पर नियंत्रण देने वाली शक्तियां हैं। ये सिद्धियां हनुमान जी को राम भक्ति और सेवा में सहायक बनीं। हनुमान जी की अष्ट सिद्धियां निम्नलिखित हैं:

  1. अणिमा: शरीर को अत्यंत सूक्ष्म (अणु के समान छोटा) बनाने की शक्ति। इससे कोई भी छोटी जगह में प्रवेश किया जा सकता है।
  2. महिमा: शरीर को असीमित रूप से विशाल बनाने की शक्ति। हनुमान जी ने लंका दहन और समुद्र लांघते समय इसी का उपयोग किया था।
  3. गरिमा: अपने शरीर का भार अत्यधिक बढ़ाने की शक्ति। इससे कोई भी वस्तु या व्यक्ति को भारी बनाया जा सकता है
  4. लघिमा: शरीर को अत्यंत हल्का (भारहीन) बनाने की शक्ति। इससे आसानी से उड़ना या तैरना संभव होता है।
  5. प्राप्ति: इच्छित वस्तु को तुरंत प्राप्त करने की शक्ति। दूर की कोई भी चीज हाथ में आ सकती है।
  6. प्राकाम्य: इच्छा के अनुसार किसी भी काम को करने या प्रकृति को नियंत्रित करने की शक्ति। मनोवांछित फल तुरंत मिलता है।
  7. ईशित्व (ईशिता): दूसरों पर प्रभुत्व या नियंत्रण स्थापित करने की शक्ति। दैवीय शक्ति का अनुभव।
  8. वशित्व (वशिता): दूसरों को अपने वश में करने या इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण की शक्ति।

नव निधि (नौ निधियां)

नव निधियां कुबेर के खजानों से संबंधित मानी जाती हैं। ये मुख्य रूप से  धन, समृद्धि, वैभव और आध्यात्मिक संपदा का प्रतीक हैं। हनुमान जी इनके भी दाता हैं।

  1. पद्म निधि: कमल के समान शुद्ध और सात्विक संपदा। सात्विक धन और समृद्धि।
  2. महापद्म निधि: अपार धन और संपत्ति। यह स्थायी और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली समृद्धि का प्रतीक है।
  3. शंख निधि: यश, सम्मान और सफलता देने वाली निधि। शंख की तरह स्पष्ट और गूंजती हुई कीर्ति।
  4. मकर निधि: शक्ति और साहस। नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली।
  5. कच्छप निधि:  स्थिरता और दीर्घायु। स्थिर, लंबे समय तक टिकने वाली समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक है।
  6. मुकुंद निधि: यह भावनात्मक सुख, करुणा और ईश्वरीय आशीर्वाद का खजाना है। राजसी वैभव भी प्रदान करती है।
  7. नंद निधि: आनंद और दिव्य सुरक्षा। यह सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
  8. नील निधि: ज्ञान, बुद्धि और व्यापारिक सफलता। इसमें सात्विक और राजसी गुणों का मिश्रण ।
  9. खर्व निधि: असीमित या गुप्त संपदा का प्रतीक। अलौकिक या छिपा हुआ खजाना है।

(डिस्क्लेमर : ये लेख विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखा गया है। हम इसे लेकर कोई दावा नहीं करते हैं।)