मराठालैंड की पॉलिटिक्स को आप चर्चा से बाहर कभी रख ही नहीं सकते। महाराष्ट्र की राजनीति में सस्पेंस भी है और कई बार चौंकाने वाले घटनाक्रम भी हैं। इसी कड़ी में पिछले दिनों ठाकरे ब्रदर्स एक हुए। माहौल बन गया। ठाकरे परिवार के प्रशंसक लगातार मराठी अस्मिता गदर काट रहे हैं। इसी बीच बीजेपी ने भी अपनी अगली चाल चल दी। केंद्र सरकार की तरफ से तेज तर्रार और सीनियर वकील उज्ज्वल निकम को राज्यसभा में मनोनीत कर दिया गया।

उज्ज्वल निकम को राज्यसभा भेजना ठाकरे को जवाब देना?

यह सब तब हुआ है जब ठाकरे की पार्टियों ने हिंदी थोपे जाने आरोपों के बीच आंदोलन की लगभग चेतावनी दी थी। अब एक्सपर्ट इन विश्लेषण में लग गए हैं कि क्या उज्ज्वल निकम को राज्यसभा भेजना ठाकरे को एक तरह से जवाब देना है। ध्यान रहे महाराष्ट्र में यह वही समय है जब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की सेना एकजुट होकर मराठी भावना का माहौल कम से कम सड़कों पर बनाने में कामयाब होती दिख रही है।

प्रतीकों की राजनीति में एक सधा हुआ दांव

असल में महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। कारण कि महाराष्ट्र में जल्द ही बीएमसी और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में मराठी अस्मिता के सवाल पर घिरती देवेंद्र फडणवीस सरकार के लिए उज्ज्वल निकम भीषण गर्मी में ठंडी फुहार जैसा साबित हो सकते हैं। यह बीजेपी का प्रतीकों की राजनीति में एक सधा हुआ दांव माना जा रहा है।

उज्जवल निकम सिर्फ चर्चित वकील ही नहीं बल्कि मराठी समाज से गहराई से जुड़े व्यक्ति भी हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया था लेकिन वे चुनाव हार गए। बावजूद इसके बीजेपी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा में भेजा है। एक्सपर्ट्स का क्लियर मानना है कि यह संकेतात्मक राजनीति का हिस्सा है। लेकिन बीजेपी की तरफ से मराठी समुदाय को यह संदेश दिया जा रहा सके कि पार्टी मराठी पहचान को सम्मान देती है।

 पीएम मोदी.. मराठी में संवाद करना

इतना ही नहीं पीएम मोदी द्वारा निकम से मराठी में संवाद करना भी इसी दिशा में एक संदेश ही है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि उज्ज्वल निकम एक बड़ा चेहरा हैं। हालांकि ठाकरे बंधुओं के मराठी नैरेटिव का मुकाबला वे कितने असरदार ढंग से कर पाएंगे यह तो वक्त ही बताएगा। मगर महाराष्ट्र के आगामी स्थानीय चुनाव इस संदेश की सियासत की असली परीक्षा जरूर साबित होंगे।