आज भारत के महान राजनेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर राजधानी दिल्ली के राजघाट स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पर श्रद्धांजलि का माहौल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर दोनों नेताओं ने कहा कि वाजपेयी का जीवन सेवा, समर्पण और राष्ट्रवाद की मिसाल है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा- “अटल जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत-शत नमन। भारत की सर्वांगीण प्रगति के प्रति उनका समर्पण और सेवाभाव सभी को एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

वरिष्ठ नेताओं और परिवार का नमन

श्रद्धांजलि देने वालों में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, और दिल्ली भाजपा की कार्यवाहक अध्यक्ष रेखा गुप्ता भी शामिल हुए। सभी ने पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। इस अवसर पर वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य और परिवारजन भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अटल जी की स्मृतियां केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देश की धरोहर हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि “अटल बिहारी वाजपेयी साहसी और दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने देश को सर्वोपरि रखने के दर्शन का पालन किया और जीवनभर उसी के लिए कार्य किया।”

अटल जी का सियासी सफर और उपलब्धियां

अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक करियर भारतीय लोकतंत्र की अद्वितीय मिसाल है। वे 16 मई से 31 मई 1996 तक पहली बार प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 19 मार्च 1998 से 13 मई 2004 तक उन्होंने लगातार प्रधानमंत्री पद संभाला। वे जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसे पहले नेता थे जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। साथ ही इंदिरा गांधी के बाद वे एकमात्र ऐसे नेता रहे जिन्होंने तीन बार लगातार अपनी पार्टी को जीत दिलाई।

कुछ ऐतिहासिक निर्णय

पोखरण परमाणु परीक्षण (1998): वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को अपनी सामरिक शक्ति का परिचय दिया।
लाहौर बस यात्रा और कारगिल युद्ध (1999): उन्होंने शांति की पहल भी की और युद्ध के समय कठोर निर्णय भी लिए।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: ग्रामीण भारत को जोड़ने की ऐतिहासिक पहल।
स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना: देश के प्रमुख महानगरों को आधुनिक सड़कों से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी योजना।

सम्मान, व्यक्तित्व और विरासत

25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल जी चार दशकों तक संसद के सक्रिय सदस्य रहे। 1957 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे और इसके बाद से उन्होंने लगातार भारतीय राजनीति में अपनी गहरी छाप छोड़ी। वर्ष 1992 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1994 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरस्कार मिला। 2014 में भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की और 2015 में उन्हें यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया। अटलजी को एक कवि और ओजस्वी वक्ता के रूप में भी जाना जाता है। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं की गहरी छाप मिलती है। संसद में उनके भाषण विपक्षी दलों को भी प्रभावित कर जाते थे। 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी स्मृति को जीवित रखने के लिए दिल्ली में ‘सदैव अटल’ स्मारक बनाया गया है, जो आज भी सभी को उनके योगदान की याद दिलाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक प्रधानमंत्री नहीं बल्कि भारत की राजनीति के उस अध्याय का नाम हैं, जिसमें संवाद, सहमति और संवेदनशीलता का सुंदर संगम दिखाई देता है। उनकी पुण्यतिथि पर राष्ट्र ने एक बार फिर उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व न केवल सत्ता चलाने से बल्कि जनता के दिलों में जगह बनाने से कायम होता है। अटल जी की विरासत भारतीय लोकतंत्र में सदैव जीवित रहेगी।