कोलकाता: लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों के ऐलान के साथ ही पश्चिम बंगाल में आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन का पहला मामला दर्ज किया गया है। यह आरोप दुर्गापुर पश्चिम से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक लक्ष्मण चंद्र घोरुई पर लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि विधायक ने आचार संहिता लागू होने के बाद भी स्थानीय लोगों के बीच सामान वितरित किया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
राज्य में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद किसी भाजपा विधायक के खिलाफ यह पहली आधिकारिक शिकायत है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, एक बार आचार संहिता लागू हो जाने पर, कोई भी उम्मीदवार, विधायक या राजनीतिक दल मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार की सामग्री, उपहार या नकदी नहीं बांट सकता है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, 15 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा आचार संहिता लागू किए जाने के बावजूद, विधायक लक्ष्मण चंद्र घोरुई को कथित तौर पर अपने क्षेत्र में लोगों को सामान बांटते हुए देखा गया। टीएमसी ने इसे मतदाताओं को लुभाने का एक प्रयास बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने राज्य में चुनावी माहौल को गरमा दिया है और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की चुनौती को उजागर किया है।
आचार संहिता उल्लंघन के क्या हैं नियम?
आदर्श आचार संहिता का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, ताकि सभी दलों को समान अवसर मिले और कोई भी सत्ता या संसाधनों का दुरुपयोग न कर सके। आचार संहिता का उल्लंघन तब माना जाता है जब कोई राजनीतिक दल या उम्मीदवार:
- सरकारी मशीनरी या सुविधाओं का चुनावी प्रचार के लिए इस्तेमाल करे।
- धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर नफरत फैलाकर वोट मांगे।
- बिना पूर्व अनुमति के रैली, जुलूस या सभा का आयोजन करे।
- मतदाताओं को रिश्वत देने या उन्हें किसी भी प्रकार का प्रलोभन देने की कोशिश करे।
बंगाल में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को 142 सीटों पर होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी। इस शिकायत के बाद अब चुनाव आयोग के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।







