पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। बीते कुछ हफ्तों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ED ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है, कई संपत्तियां अटैच की हैं, समन जारी किए हैं और चार्जशीट दाखिल की है। इन कार्रवाइयों में राजनीतिक नेता, अधिकारी, कारोबारी और अपराध सिंडिकेट से जुड़े लोग जांच के दायरे में हैं। इनमें IPAC केस, पार्थ चटर्जी से जुड़े मामले, सोना पप्पू सिंडिकेट, पीडीएस राशन घोटाला और कोयला तस्करी जैसे कई बड़े मामले शामिल हैं।
IPAC केस में ED की बड़ी कार्रवाई
सबसे पहले बात IPAC केस की। 2 अप्रैल 2026 को ED ने देश के छह शहरों हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, विजयवाड़ा और रांची में एक साथ 11 ठिकानों पर छापेमारी की। ये छापे IPAC के दफ्तरों, उसके डायरेक्टर्स के घरों और उससे जुड़ी कंपनियों के ऑफिस पर मारे गए। जांच के दौरान ED को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग और घरेलू ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि कहीं चुनावी गतिविधियों के नाम पर अवैध फंडिंग तो नहीं हो रही थी। इस मामले में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद जबरन दस्तावेज लेकर चली गई थीं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार भी लगाई थी।
पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी पर भी ED का शिकंजा
पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी एक बार फिर ED के निशाने पर हैं। 11 अप्रैल 2026 को कोलकाता में उनके आवास और उनके सहयोगी प्रसन्न कुमार रॉय के दफ्तर पर छापेमारी की गई। ED के मुताबिक, SSC भर्ती घोटाले में उन्हें तीन बार समन भेजा गया था, लेकिन वे एक बार भी पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए। गौरतलब है कि 2022 में प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 2025 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिली थी। अब ED उनके खिलाफ प्राथमिक शिक्षक, SSC असिस्टेंट टीचर और ग्रुप C-D भर्ती से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है। यह दिखाता है कि एजेंसी पुराने मामलों को भी नहीं भूली है और उन पर भी शिकंजा कस रही है।
सोना पप्पू के खिलाफ ED की कार्रवाई
कोलकाता में कुख्यात सिंडिकेट से जुड़े बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू के खिलाफ ED ने 1 अप्रैल को 8 जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान करीब 1.47 करोड़ रुपये नकद, 67 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, एक फॉर्च्यूनर गाड़ी और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके घर से ‘Made in USA’ लिखा हुआ एक रिवॉल्वर भी मिला, जिसे बाद में पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया गया। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क उगाही, जमीन कब्ज़ा और अवैध निर्माण के जरिए भारी मात्रा में काला पैसा बना रहा था। फिलहाल सोना पप्पू फरार है और ED के समन के बावजूद जांच में शामिल नहीं हो रहा है। इस मामले में कारोबारी जय कमदार को भी समन जारी किया गया है, जिनके तार पुलिस अधिकारी संतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े बताए जा रहे हैं। ED ने सोना पप्पू केस में दो लोगों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। इन दोनों को कल कोलकाता में ईडी दफ्तर में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इस मामले में कई टीएमसी नेताओं की भूमिका भी सामने आ रही है और वे जांच के दायरे में हैं।
अमित गांगुली और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी
28 मार्च 2026 को ED ने कोलकाता में 7 ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई जमीन कब्ज़ा और फर्जीवाड़े के आरोपी अमित गांगुली और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और नकली दस्तावेज बनाकर महंगी जमीनों पर कब्ज़ा करते थे। इसके बाद उन्हीं जमीनों पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट बनाकर आम लोगों को बेच दिया जाता था। इस पूरे खेल में बैंक खातों का इस्तेमाल कर मनी लॉन्ड्रिंग भी की गई। ED ने कई बैंक अकाउंट फ्रीज किए हैं। आरोपियों के खिलाफ 20 से ज्यादा FIR पहले से दर्ज हैं। यह मामला दिखाता है कि कैसे संगठित तरीके से जमीन हड़पकर अवैध संपत्ति बनाई जा रही थी।
PDS राशन घोटाला पर ED की कार्रवाई
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) राशन घोटाले में भी ED ने कार्रवाई की है। 10 अप्रैल 2026 को ED ने 17 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें निरंजन चंद्र साहा और उसके नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल हैं। आरोप है कि सरकारी राशन यानी पीडीएस का गेहूं गरीबों तक पहुंचने के बजाय अवैध तरीके से बाजार और एक्सपोर्ट में बेचा जा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी FCI के बोरे बदलकर गेहूं की पहचान मिटा देते थे और उसे निजी माल की तरह बेचते थे। इस दौरान करीब 31.9 लाख रुपये नकद और कई डिजिटल सबूत जब्त किए गए। यह घोटाला सीधे आम जनता के हक पर डाका डालने का मामला है।
मर्लिन ग्रुप केस में 7 ठिकानों पर छापेमारी
8 अप्रैल 2026 को ED ने मर्लिन प्रोजेक्ट लिमिटेड से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी की। कंपनी के प्रमोटर सुशील मोहता और साकेत मोहता पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पकर बड़े प्रोजेक्ट खड़े किए। ED को जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस ग्रुप के राज्य के बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों से संबंध हो सकते हैं। फिलहाल इन वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। यह मामला जमीन से जुड़े बड़े सिंडिकेट और उसमें राजनीतिक गठजोड़ की ओर इशारा करता है।
NRI कोटे के जरिए दाखिले में फर्जीवाड़ा
कोलकाता पुलिस के अधिकारी सांतनु सिन्हा बिश्वास को ED ने समन जारी किया है। यह मामला मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे के तहत फर्जी दाखिले से जुड़ा है। ED के मुताबिक, करीब 85 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए छात्रों को NRI कोटे में दाखिला दिलाया गया। संतनु सिन्हा बिस्वास ने ED के समन को कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अभी तक ED की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगी है। यह एक गंभीर मामला है जहां शिक्षा क्षेत्र में बड़े स्तर पर धांधली हुई है।
अवैध कोयला खनन मामले में कार्रवाई
अवैध कोयला खनन और वसूली के मामले में भी ED सक्रिय है। 9 अप्रैल 2026 को ED ने इस मामले में विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इस केस में चिनमोय मंडल और किरण खान समेत कई आरोपी शामिल हैं। जांच में खुलासा हुआ कि कोयला माफिया ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से ‘गुंडा टैक्स’ वसूलते थे, जो कोयले की कीमत का 20-25% तक होता था। पिछले पांच साल में सिर्फ उगाही से ही 650 करोड़ रुपये का काला धन इकट्ठा किया गया। यह राज्य में संगठित अपराध और अवैध उगाही का एक बड़ा उदाहरण है।
कृष्णा दमानी और उनके परिवार की संपत्ति अटैच
ED ने कृष्णा दमानी और उनके परिवार से जुड़ी 18.5 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। आरोप है कि साउथ प्वाइंट एजुकेशन सोसायटी के फंड को फर्जी बिल, नकली कर्मचारियों और गलत भुगतान के जरिए निकाला गया। इस पैसे को बाद में म्यूचुअल फंड, शेयर और कंपनियों में निवेश कर सफेद किया गया। यह दिखाता है कि कैसे शिक्षा के नाम पर भी वित्तीय धांधली की जा रही थी।
सस्पेंडेड कस्टम अधिकारी पर ED की कार्रवाई
ED ने सस्पेंडेड कस्टम अधिकारी नवनीत कुमार की 48 लाख रुपये की संपत्ति अटैच की है। जांच में सामने आया कि 2017 में 194 करोड़ रुपये के माल को गलत तरीके से क्लियर किया गया था। आरोप है कि आरोपी ने जानबूझकर जांच से बचाने के लिए सीमित जांच के आदेश दिए और मैन्युअल क्लियरेंस का गलत इस्तेमाल किया। यह मामला सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के उदाहरण पेश करता है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ED की ये लगातार कार्रवाइयां साफ संकेत देती हैं कि भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी मुहिम चल रही है। चाहे वो कोयला घोटाला हो, भर्ती घोटाला, जमीन कब्जा या हवाला नेटवर्क, हर स्तर पर जांच एजेंसी सक्रिय नजर आ रही है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यह कार्रवाईयां राज्य में एक बड़े वित्तीय और आपराधिक सिंडिकेट के नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश मालूम होती हैं।






