राजगढ़ जिले के ब्यावरा तहसील स्थित गांगाहोनी गांव में बुधवार-गुरुवार की रात एक दुखद घटना सामने आई। 40 वर्षीय निजी स्कूल संचालक विष्णु प्रसाद लववंशी की सांप के काटने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह रात करीब 12 बजे किचन में दूध का बर्तन रखने गए थे, तभी वहां छिपे जहरीले सांप ने उनके पैर के अंगूठे पर डस लिया।
सांप के काटते ही विष्णु प्रसाद दर्द से चिल्ला उठे और घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में पहले झाड़फूंक कराने के लिए तरेनी स्थित एक देवस्थान पर रुक गए। करीब आधे घंटे तक झाड़फूंक चलती रही।
इस दौरान जहर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल गया। हालत बिगड़ने पर जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। लखनवास के पास रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है और मामले की जांच जारी है।
समय पर इलाज ही बचा सकता है जान
मानसून के दौरान खेतों, घरों और किचन जैसी जगहों पर सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के बाद सबसे जरूरी काम मरीज को बिना घबराए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना है। झाड़फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपायों में समय गंवाना कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि एंटी स्नेक वेनम यानी एएसवी ही जहरीले सांप के काटने का प्रभावी इलाज है और जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है, मरीज के बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
विष्णु प्रसाद लववंशी गांव में एक निजी स्कूल चलाते थे और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा 11 और 13 साल के दो बच्चे हैं। अचानक हुई इस घटना के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है। गांव के लोगों के अनुसार, विष्णु प्रसाद मिलनसार और समाजसेवी स्वभाव के थे तथा जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में लोगों को सही चिकित्सा जानकारी कितनी जरूरी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मानसून के मौसम में घरों और आसपास की साफ-सफाई रखने, अंधेरे स्थानों में सावधानी बरतने और रात में टॉर्च का इस्तेमाल करने जैसी छोटी सावधानियां भी ऐसे हादसों से बचाव में मददगार साबित हो सकती हैं।






