सर्दियों की शुरुआत होते ही कई घरों में तुलसी का पौधा अचानक मुरझाने लगता है। पत्तियां काली पड़ जाती हैं, किनारे से सूखने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर दिखता है। लोग अक्सर इसे ठंड, पाले या पानी की कमी का परिणाम मान लेते हैं, लेकिन दिल्ली-एनसीआर और बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण इसका एक बड़ा कारण भी बन सकता है।
इस असर का पता धीरे-धीरे चलता है, इसलिए अधिकतर लोग समय रहते इसकी असली वजह को नहीं समझ पाते। तुलसी पौधा आसपास के वातावरण के प्रति संवेदनशील होता है। जब हवा साफ होती है, तो तुलसी हरी, घनी और खुशबूदार रहती है। लेकिन जैसे ही हवा में धूल, धुआं और सूक्ष्म जहरीले कण बढ़ते हैं, इसका असर सबसे पहले तुलसी की पत्तियों पर दिखने लगता है।
तुलसी की पत्तियों को प्रदूषण कैसे प्रभावित करता है
बहुत से लोग मानते हैं कि सर्दियों में तुलसी का काला होना सामान्य है। लेकिन अगर पौधे को पर्याप्त धूप मिल रही हो, पानी सही समय पर दिया जा रहा हो, और फिर भी तुलसी मुरझा रही हो, तो वजह कुछ और हो सकती है। शहरों की हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कण पत्तियों पर जमा हो जाते हैं। ये कण दिखाई नहीं देते, लेकिन धीरे-धीरे पत्तियों पर एक धूसर या काली परत बना लेते हैं।
यह परत पत्तियों की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे छिद्रों पर असर डाल सकती है। इन छिद्रों से पौधा गहरी सांस और प्रकाश संश्लेषण करता है। कण जमा होने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे पत्तियां पहले मुरझाती हैं, फिर काली पड़ने लगती हैं और आखिरकार सूखने लगती हैं। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रदूषण पौधों के लिए धीरे-धीरे नुकसान करने वाला कारक बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण से बचाव
यदि तुलसी की पत्तियों पर बिना किसी बीमारी के काली परत या धूसर रंग दिखने लगे, नई पत्तियां धीरे-धीरे न आएं और पौधा कमजोर लगे, तो यह प्रदूषण के कारण हो सकता है। केवल खाद बढ़ाना या पानी ज्यादा देना नुकसान भी कर सकता है। असली जरूरत होती है पत्तियों को साफ रखना और पौधे को जहरीली हवा से बचाना।
बागवानी विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रदूषण से बचाव का सबसे आसान तरीका पत्तियों को हल्का पानी छिड़क कर साफ करना है। इससे धूल और जहरीले कण हट जाते हैं और पौधा फिर से सांस लेने और प्रकाश संश्लेषण करने में सक्षम हो जाता है। यह काम सुबह के समय करना उचित होता है, क्योंकि उस वक्त हल्की धूप और कम नमी होती है।
देसी उपाय और सुरक्षित पोषण
प्रदूषण ज्यादा होने और तुलसी बार-बार मुरझाने पर कुछ घरेलू उपाय मददगार साबित हो सकते हैं। मिट्टी में हल्दी मिलाने से उसमें मौजूद फंगस और हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, बहुत सीमित मात्रा में लकड़ी की राख मिट्टी में डालना पौधे को बाहरी प्रदूषण से थोड़ी सुरक्षा दे सकता है, लेकिन इसे पत्तियों पर सीधे नहीं डालना चाहिए।
सही पोषण भी जरूरी है। हल्की और सीमित मात्रा में लिक्विड खाद देना पौधे की जड़ों और पत्तियों को मजबूत बनाता है। जब जड़ें मजबूत होती हैं, तो पौधा प्रदूषण और ठंडी हवा के प्रभाव से बेहतर तरीके से बच सकता है। नियमित लेकिन सावधानीपूर्वक पोषण देने से तुलसी की पत्तियों में चमक लौट आती है और काला पड़ना कम हो जाता है।
तुलसी का स्थान और वातावरण का महत्व
सर्दियों और प्रदूषण के मौसम में तुलसी की जगह बहुत महत्वपूर्ण है। अगर पौधा ऐसी जगह रखा हो जहां धुआं, धूल और ठंडी हवा सीधे लगती रहे, तो वह जल्दी कमजोर हो जाता है। तुलसी को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां दिन में कुछ घंटे धूप मिले और हवा बहुत ज्यादा जहरीली न हो। रात के समय जब धुंध और प्रदूषण ज्यादा बढ़ जाता है, तब तुलसी को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखना फायदेमंद होता है। इससे पौधा ठंडी और जहरीली हवा से बचा रहता है और धीरे-धीरे स्वस्थ रहने लगता है।
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