Mon, Jan 5, 2026

भूले हुए कर्मों का फल क्यों मिलता है? प्रेमानंद महाराज ने सरल शब्दों में समझाया

Written by:Bhawna Choubey
Published:
भगवान कर्मों का फल कैसे देते हैं? अगर हमें अपने पुराने कर्म याद नहीं, फिर सजा क्यों? वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने प्रवचन में कर्म, आत्मा और स्मृति का ऐसा सरल रहस्य बताया, जो हर उम्र के पाठक को समझ आ जाए।
भूले हुए कर्मों का फल क्यों मिलता है? प्रेमानंद महाराज ने सरल शब्दों में समझाया

हम सबके मन में कभी न कभी यह सवाल जरूर उठता है कि अगर हमें अपने किए हुए पुराने कर्म याद ही नहीं हैं, तो फिर उनका फल क्यों मिलता है। क्या यह न्याय है? क्या भगवान हमारी कमजोर याददाश्त को नहीं जानते? यही जिज्ञासा हाल ही में वृंदावन में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के एक प्रवचन के दौरान सामने आई, जब एक भक्त ने उनसे यह सवाल सीधे पूछ लिया।

यह बात प्रेमानंद महाराज के वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम में दिए गए एक हालिया प्रवचन में कही गई, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया और श्रद्धालुओं के बीच हो रही है। अपने शांत स्वभाव और सरल भाषा के लिए पहचाने जाने वाले प्रेमानंद महाराज ने कर्म, स्मृति और जीवन के नियमों को ऐसे उदाहरणों से समझाया कि आम व्यक्ति भी इसे आसानी से समझ सके।

प्रेमानंद महाराज और उनके प्रवचन की पहचान

प्रेमानंद महाराज वृंदावन के जाने-माने संत और आध्यात्मिक गुरु हैं। वे नियमित रूप से केली कुंज आश्रम में प्रवचन और सत्संग करते हैं। इन सत्संगों में अलग-अलग उम्र और वर्ग के लोग शामिल होते हैं। उनके प्रवचन का खास पहलू यह है कि वे कठिन दार्शनिक बातों को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझाते हैं। यही वजह है कि उनके विचार लोगों को जल्दी समझ आते हैं और लंबे समय तक याद रहते हैं। उनका मानना है कि अध्यात्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम होना चाहिए। इसी सोच के साथ वे कर्म, जीवन और आत्मा जैसे विषयों पर बात करते हैं।

कर्म याद नहीं, फिर परिणाम क्यों मिलता है?

प्रवचन के दौरान एक भक्त ने सवाल किया कि अगर इंसान को अपने पिछले कर्म याद ही नहीं रहते, तो फिर भगवान उनका फल क्यों देते हैं। इस सवाल में कई लोगों की उलझन छिपी होती है, क्योंकि हम अक्सर यही सोचते हैं कि जो याद न हो, उसकी जिम्मेदारी कैसे ली जाए। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कर्म का नियम हमारी याददाश्त पर नहीं, बल्कि हमारे किए गए कामों पर आधारित होता है। उनका कहना है कि कर्म का फल मिलना कोई सजा नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक नियम है। जैसे बीज बोने के बाद फल आता ही है, वैसे ही कर्म करने के बाद उसका परिणाम सामने आता है।

मनुष्य की स्मृति कितनी सीमित है

इस बात को समझाने के लिए प्रेमानंद महाराज ने इंसान की स्मृति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इंसान की याददाश्त बहुत कमजोर होती है। हमें अपने जीवन की कई घटनाएं याद नहीं रहतीं। बचपन की बातें, मां के गर्भ में बिताया समय या कुछ साल पहले की छोटी घटनाएं भी हम भूल जाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब हम अपने इसी जीवन की इतनी बातें भूल जाते हैं, तो फिर पिछले जन्म की बातें कैसे याद रहेंगी। उनके अनुसार, याद न रहना कर्मों को खत्म नहीं करता। कर्म अपने आप में बने रहते हैं और समय आने पर उनका फल सामने आता है।

आत्मा और कर्म का संबंध

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, आत्मा शरीर के साथ खत्म नहीं होती। उनका मानना है कि आत्मा शरीर बदलती है, जैसे इंसान पुराने कपड़े उतारकर नए कपड़े पहनता है। शरीर बदल जाता है, लेकिन आत्मा अपने साथ कर्मों का हिसाब लेकर चलती है। उन्होंने बताया कि पिछले जीवन में किए गए कर्म इस जीवन में सुख या दुख के रूप में सामने आ सकते हैं। कई बार हमें बिना किसी साफ वजह के मुश्किलों का सामना करना पड़ता है या अचानक सुख मिल जाता है। उनके अनुसार, इसके पीछे कर्मों का ही नियम काम करता है।

भूल जाने से कर्म का परिणाम खत्म नहीं होता

अपने विचार को और साफ करने के लिए प्रेमानंद महाराज ने एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है और कई साल बाद उसे सजा मिलती है, तो हो सकता है कि वह व्यक्ति उस अपराध को भूल चुका हो। लेकिन क्या केवल भूल जाने से सजा खत्म हो जाती है? नहीं। उन्होंने साफ किया कि यह उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए है। जैसे मानव कानून में अपराध का हिसाब रहता है, वैसे ही ईश्वर के नियम में कर्मों का हिसाब रहता है। इंसान को याद रहे या न रहे, कर्म का परिणाम अपने समय पर सामने आता है।

कर्म का फल दंड नहीं, सीख है

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कर्म का फल किसी को सजा देने के लिए नहीं होता, बल्कि इंसान को सीख देने के लिए होता है। हर अनुभव, चाहे वह सुख का हो या दुख का, इंसान को कुछ न कुछ सिखाता है। उनका मानना है कि अगर इंसान अपने कर्मों को समझ ले और सही दिशा में चलने लगे, तो जीवन अपने आप बेहतर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान जीवन में किए गए अच्छे कर्म भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। इसलिए इंसान को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि वह क्या कर रहा है और उसके कर्मों का असर आगे क्या हो सकता है।