सुबह की पहली रोशनी जैसे ही घरों, दुकानों और कार्यशालाओं में पहुंचती है, विश्वकर्मा पूजा की शुरुआत हो जाती है। साल 2025 में यह पर्व 17 सितंबर को, कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाएगा। इस दिन मजदूर, कारीगर और ऑफिस में काम करने वाले लोग सभी यही प्रार्थना करते हैं कि उनके औजार और मशीनें बिना किसी दिक्कत के सही तरह से चलें।
15-16 घंटे मशीनों की गड़गड़ाहट में लगे लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उन्हें मानवीय गरिमा, सुरक्षा और आशीर्वाद का एहसास दिलाती है। इस दिन लोग अपने औजार साफ करते हैं, उन्हें फूल, हल्दी-कुमकुम लगाते हैं और विश्वकर्मा भगवान की उपासना करते हुए मंत्रों के ज़रिये अपने मन की इच्छाएँ उनसे पूछते हैं।
पूजा का महत्व और सही समय
विश्वकर्मा पूजा, कन्या के साथ मनाई जाएगी यह दिन सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह दिन विशेष रूप से 17 सितंबर को तय है। पूजा की शुभ शुरुआत का समय मुहूर्त सुबह 6:07 बजे से मध्याह्न 12:15 बजे तक है।
कौन करता है पूजा?
यह पूजा खासतौर पर उन लोगों द्वारा की जाती है जिनका पेशा मशीनों, उपकरणों, निर्माण कार्यों, शिल्प और तकनीकी कार्यों से जुड़ा हो। इंजीनियर, आर्किटेक्ट, कारपेंटर, मिस्त्री, फैक्टरी मजदूर आदि इस दिन अपने औजारों को साफ-सुथरा करके, उन्हें पूजा स्थल पर रखते हैं और भगवान विश्वकर्मा से सुरक्षा और सफलता की कामना करते हैं।
मंत्र और जप सही तरीके से कैसे करें
विश्वकर्मा के 108 नामों का जप
शास्त्रों में कहा गया है कि विश्वकर्मा भगवान के 108 नामों को उच्चारित करना अत्यंत फलदायी है। ये नाम उनके विभिन्न गुणों और रचनात्मक शक्तियों को दर्शाते हैं जैसे “विस्वकर्मा देव”, “श्री सृष्टिकर्ता”, “वास्तु देव”, आदि। प्रत्येक नाम का जप आसन पर बैठकर, शांत मन से करना चाहिए। इस अभ्यास से मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है।
अन्य उपयोगी मंत्र
ॐ विश्वकर्मणे नमः
यह मूल मंत्र है जो धन्यवाद एवं आशीर्वाद के लिए जपा जाता है।
ॐ श्री सृष्टि तनय सर्व सिद्धाय विश्वकर्माय नमो नमः
इस मंत्र के जप से नई रचनाएँ सफल होती हैं और रचनात्मक प्रेरणा मिलती है।
ॐ आधार शक्तपाये नमः, ॐ अनंत देवाय नमः
इन मंत्रों के साथ प्रार्थना की जाती है कि कर्म स्थिर और सकारात्मक हों।
पूजा-विधि और पूजा सामग्री
पूजा की शुरुआत सुबह स्नान-ध्यान से करें। पूजा स्थान को साफ करें। औजार, मशीनें और कार्यस्थल सजाएँ। दीपक, फूल, हल्दी-कुमकुम, अग्नि (अगर संभव हो) और प्रसाद तैयार रखें। मंत्रजप, आरती और भोग अर्पित करें। पूजा के बाद एक दिन उपयोग से बचना चाहिए ताकि दिन भर की पूजा व्रत की पूर्णता बनी रहे।
असर और लाभ
1. कार्यस्थल की सुरक्षा और उत्पादकता बढ़ेगी
विश्वकर्मा पूजा के दौरान औजारों और मशीनों की पूजा करने से उनकी रखरखाव की याद होती है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है और उपकरणों की मरम्मत व रख-रखाव समय से होता है, जिससे काम फास्ट और सुरक्षित होता है।
2. मानसिक संतुलन और प्रेरणा मिलेगी
मंत्रों का जप और पूजा का वातावरण श्रमजीवी लोगों के मन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। मानसिक तनाव कम होता है। आत्म-विश्वास बढ़ता है। जिससे काम में लगन और गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
3. सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
विश्वकर्मा पूजा सिर्फ व्यक्तिगत पूजा नहीं है। यह त्योहार कारीगरों, उद्योगों, छोटे दुकानदारों और प्रतिष्ठानों के बीच संबंधों को मज़बूत करता है। लोग मिलजुल कर पूजा करते हैं, प्रसाद बाँटते हैं, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन करते हैं जिससे समुदाय में भाईचारा बढ़ता है।





