इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 की शुरुआत 28 मार्च से हो रही है, लेकिन उससे पहले गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने बीसीसीआई द्वारा लागू ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गिल ने साफ शब्दों में कहा है कि क्रिकेट मूल रूप से 11 खिलाड़ियों का खेल है, 12 का नहीं, और यह नियम खेल के कौशल तथा चुनौती की अहमियत को कम कर रहा है। मुंबई में बुधवार, 25 मार्च को हुई आईपीएल कप्तानों की एक अहम बैठक में शुभमन गिल समेत अधिकतर कप्तानों ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से इस नियम की गंभीरता से समीक्षा करने की मांग की है।
‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम को लेकर अपनी गहरी आपत्ति स्पष्ट करते हुए शुभमन गिल ने सीधे तौर पर कहा:
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“मेरे हिसाब से ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नहीं होना चाहिए। क्रिकेट आम तौर पर 11 खिलाड़ियों का खेल है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेल के मैदान पर एक अतिरिक्त बल्लेबाज या गेंदबाज को जोड़ने का सीधा असर खेल की मूल प्रकृति पर पड़ता है। गिल का मानना है कि इससे मैच जीतने के लिए आवश्यक असली चुनौती और खिलाड़ी के व्यक्तिगत कौशल, जैसे कि विषम परिस्थितियों में दबाव झेलना या अप्रत्याशित रणनीति बनाना, की अहमियत कम हो जाती है। यह नियम खेल के पारंपरिक स्वरूप में एक बड़ा बदलाव लाता है, जिसके कारण मैच का प्रवाह और रणनीतिक गहराई प्रभावित होती है।
गिल ने अपनी बात को समझाते हुए कहा कि खेल में एक विशिष्ट कौशल और गहरी रणनीति की मांग होती है। उन्होंने खासकर उन परिस्थितियों का जिक्र किया जब टीम मुश्किल में होती है। उन्होंने कहा:
“अगर आपके कुछ मुख्य बल्लेबाज जल्दी आउट हो जाएं, तो टीम को अच्छा स्कोर बनाने के लिए रणनीति और कौशल की जरूरत होती है, लेकिन इस एक अतिरिक्त खिलाड़ी से खेल एकतरफा हो गया है और चुनौती भी कम हो गई है।”
पूरी क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर नहीं मिलता
उनके अनुसार, इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में एक अतिरिक्त खिलाड़ी को उतारने से, ऐसी गंभीर स्थितियों में टीम को उतनी कड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही खिलाड़ियों को अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है। इससे खेल की प्रतिस्पर्धात्मकता और रोमांच में कमी आती है, क्योंकि टीमें किसी भी खराब प्रदर्शन की भरपाई आसानी से कर सकती हैं।
अपनी बात को साबित करने के लिए गिल ने एक दिलचस्प तुलना भी की। उन्होंने कहा:
“मेरे लिए आसान पिच पर 220 रन का पीछा करने से ज्यादा रोमांचक चुनौती वाली पिच पर 180 या 160 रन का पीछा करना है।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि गिल खेल में मुश्किल परिस्थितियों और व्यक्तिगत कौशल के माध्यम से उन मुश्किलों से निकलने को अधिक महत्व देते हैं, बजाय इसके कि एक अतिरिक्त खिलाड़ी से स्थितियों को आसान बनाया जाए। उनका मानना है कि असली क्रिकेट वही है जहां हर खिलाड़ी की भूमिका निर्णायक हो, और टीम को हर मुश्किल से खुद के दम पर निकलना पड़े।
शुभमन गिल अकेले नहीं हैं जिन्होंने इस नियम पर आपत्ति जताई
शुभमन गिल अकेले नहीं हैं जिन्होंने इस नियम पर आपत्ति जताई है। उनसे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा, स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और हाल ही में दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल भी ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम के विरोध में अपनी आवाज उठा चुके हैं। इन बड़े खिलाड़ियों का एक साथ इस नियम पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के एक बड़े वर्ग की सामूहिक चिंता है जो खेल की प्रकृति पर इसके प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।
बीसीसीआई ने इस ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम को साल 2023 में आईपीएल में लागू किया था और इसे कम से कम साल 2027 तक के लिए बढ़ाया गया है। कप्तानों की बैठक में इस नियम पर विस्तृत चर्चा हुई, जहां अधिकांश कप्तानों ने इसकी समीक्षा की मांग की। हालांकि गिल ने यह भी स्वीकार किया कि इस नियम से खेल थोड़ा मनोरंजक बनता है, पर उन्होंने साफ किया कि उन्हें यह व्यक्तिगत तौर पर पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला बीसीसीआई का ही होगा। बीसीसीआई ने संकेत दिए हैं कि इस नियम पर अंतिम फैसला साल 2027 के बाद ही लिया जा सकता है, जब इसका मौजूदा कार्यकाल पूरा हो जाएगा। खिलाड़ियों की आपत्तियों और खेल पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को देखते हुए बोर्ड पर इसकी समीक्षा का दबाव बढ़ सकता है।