दुनियाभर में करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग ऐप WhatsApp की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘प्राइवेसी’ मानी जाती है। लेकिन अब इसी भरोसे को कानूनी चुनौती मिली है। अमेरिका में टेक दिग्गज कंपनी Meta के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption) के नाम पर यूजर्स को गुमराह कर रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि WhatsApp पर भेजे गए मैसेज पूरी तरह निजी नहीं हैं और कंपनी के पास उन्हें एक्सेस करने की क्षमता है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें सिर्फ अमेरिकी यूजर्स ही नहीं, बल्कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका के यूजर्स भी शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर कंपनी की डेटा सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
क्या कंपनी पढ़ सकती है आपके मैसेज?
दायर शिकायत के अनुसार, मेटा और वॉट्सऐप यूजर्स के मैसेज को न केवल स्टोर करते हैं, बल्कि उनका विश्लेषण (Analysis) करने की तकनीकी क्षमता भी रखते हैं। आरोपों में कहा गया है कि कंपनी ने ‘प्राइवेट मैसेजिंग’ का प्रचार करके दुनिया भर के यूजर्स को धोखे में रखा है। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि अगर मैसेज वास्तव में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते, तो कंपनी के पास किसी भी स्थिति में उन्हें पढ़ने या स्कैन करने का विकल्प नहीं होना चाहिए था।
व्हिसल ब्लोअर ने खोली पोल
इस मुकदमे में कुछ ‘व्हिसल ब्लोअर’ (Whistleblowers) का भी हवाला दिया गया है। दावा किया गया है कि इन अंदरूनी सूत्रों ने वॉट्सऐप की कार्यप्रणाली को उजागर किया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आरोपों के मुताबिक, वॉट्सऐप के कर्मचारी विशेष परिस्थितियों में यूजर्स के कम्युनिकेशन तक पहुंच बना सकते हैं। यह दावा कंपनी के उस बुनियादी वादे के बिल्कुल उलट है, जो हर चैट की शुरुआत में दिखाई देता है—’No one outside of this chat, not even WhatsApp, can read or listen to them’.
मेटा ने आरोपों को बताया ‘काल्पनिक’
दूसरी तरफ, मेटा ने इन गंभीर आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुकदमे का आक्रामक तरीके से सामना करेंगे। मेटा का कहना है कि वॉट्सऐप पिछले एक दशक से इंडस्ट्री के मानक ‘Signal प्रोटोकॉल’ का उपयोग कर रहा है, जो सुरक्षा की गारंटी देता है।
“यह मुकदमा पूरी तरह से निराधार और कल्पना पर आधारित है। हम अपनी प्राइवेसी पॉलिसी और एन्क्रिप्शन तकनीक पर पूरा भरोसा रखते हैं और कोर्ट में इसे साबित करेंगे।” — एंडी स्टोन, प्रवक्ता, Meta
फिलहाल यह मामला कोर्ट में है, लेकिन इसने प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर वैश्विक बहस छेड़ दी है। अगर कोर्ट में यह साबित होता है कि एन्क्रिप्शन में कोई खामी है, तो इसका असर भारत समेत दुनियाभर के अरबों यूजर्स के भरोसे पर पड़ेगा।





