नई दिल्ली। आपने अपने फोन में लगे सिम कार्ड को तो कई बार देखा होगा, लेकिन क्या कभी इसके एक कटे हुए कोने पर ध्यान दिया है? यह छोटा सा कट सिर्फ एक डिजाइन नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बेहद जरूरी तकनीकी कारण छिपा है, जो आपके महंगे फोन को बड़े नुकसान से बचाता है।
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती दौर में सिम कार्ड पूरी तरह से चौकोर होते थे। लेकिन बाद में दुनियाभर की कंपनियों ने इस कटे हुए डिजाइन को एक मानक के तौर पर अपना लिया। यह डिजाइन सुनिश्चित करता है कि सिम कार्ड को फोन में हमेशा सही तरीके से ही लगाया जाए।
क्यों पड़ी इस डिजाइन की जरूरत?
सिम कार्ड की कहानी 1990 के दशक से शुरू होती है, जब वे क्रेडिट कार्ड जितने बड़े होते थे। जैसे-जैसे मोबाइल फोन छोटे और पतले होते गए, सिम का आकार भी मिनी, माइक्रो और फिर नैनो में बदलता गया। शुरुआती चौकोर डिजाइन के साथ सबसे बड़ी समस्या यह थी कि लोग अक्सर उसे उल्टा या गलत दिशा में फोन में लगा देते थे।
सिम कार्ड पर मौजूद सुनहरी चिप का फोन के इंटरनल स्लॉट से सही तरीके से कनेक्ट होना जरूरी है। गलत तरीके से सिम लगाने पर न सिर्फ सिम काम नहीं करता था, बल्कि कई बार फोन के अंदर मौजूद नाजुक सिम रीडर के पिन भी टूट जाते थे, जिससे फोन खराब हो जाता था।
एक वैश्विक मानक जो बचाता है नुकसान से
इस समस्या को हल करने के लिए यूरोपीय दूरसंचार मानक संस्था (ETSI) ने सिम कार्ड के एक कोने पर कट लगाने का डिजाइन पेश किया, जिसे बाद में पूरी दुनिया में एक मानक के तौर पर अपना लिया गया। यह कटा हुआ कोना एक गाइड की तरह काम करता है।
इस डिजाइन की वजह से यूजर सिम कार्ड को ट्रे में सिर्फ एक ही सही तरीके से रख सकता है। मोबाइल बनाने वाली कंपनियां भी फोन की सिम ट्रे और स्लॉट को इसी कटे हुए डिजाइन के हिसाब से बनाती हैं। इससे गलती की कोई गुंजाइश नहीं बचती और फोन और सिम दोनों सुरक्षित रहते हैं।
क्या है सिम कार्ड का भविष्य?
तकनीक के विकास के साथ अब फिजिकल सिम कार्ड का चलन धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसकी जगह अब ई-सिम (e-SIM) ले रहे हैं। ई-सिम एक डिजिटल सिम होता है, जिसे टेलीकॉम ऑपरेटर सीधे आपके फोन में एक्टिवेट कर देते हैं। कई नई स्मार्टफोन कंपनियां अब ऐसे मॉडल लॉन्च कर रही हैं जिनमें फिजिकल सिम लगाने का स्लॉट ही नहीं है। जैसे-जैसे ई-सिम का इस्तेमाल बढ़ेगा, हो सकता है कि यह कटा हुआ सिम कार्ड सिर्फ इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाए।





