श्रावण मास के दौरान हर साल उज्जैन में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार प्रशासन ने पहले से ज्यादा तैयारी की है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अब भक्तों को दो अलग-अलग रास्तों से प्रवेश दिया जाएगा। एक एंट्री श्री महाकाल महालोक से और दूसरा नया गेट हरसिद्धि चौराहा से तैयार किया गया है।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा नहीं होगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि सामान्य दिनों में 3 से 4 लाख और वीकेंड पर 5 से 7 लाख श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने पहले से ही रास्तों को व्यवस्थित कर दिया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि अब श्रद्धालुओं को लगभग 40 मिनट के अंदर दर्शन मिल सकेंगे, जो पहले काफी ज्यादा समय लेता था।
उज्जैन श्रावण भीड़ नियंत्रण योजना 2026
श्रावण-भाद्रपद मास के दौरान भीड़ को कंट्रोल करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उज्जैन प्रशासन ने खास प्लान तैयार किया है। हरसिद्धि चौराहा से एंट्री शुरू कर दी गई है ताकि भक्तों का फ्लो बराबर बना रहे।
दर्शन मार्ग पर कई सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं जैसे लड्डू प्रसाद काउंटर, शीघ्र दर्शन टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र और खोया-पाया केंद्र। यह सभी व्यवस्थाएं विक्रम टीले के आसपास बनाई गई हैं ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन का कहना है कि इस बार पूरा फोकस भीड़ को अलग-अलग हिस्सों में बांटने पर है, ताकि किसी एक गेट या मार्ग पर दबाव न बने। इससे न सिर्फ सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि बुजुर्ग और बच्चों को भी आसानी होगी।
महाकाल सवारी 2026 और भस्म आरती टाइमिंग
श्रावण मास में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की सबसे खास पहचान भगवान महाकाल की सवारी होती है। इस बार 3 अगस्त से 7 सितंबर तक कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी, जिसमें अंतिम सवारी राजसी स्वरूप में होगी। हर सोमवार को महाकाल की सवारी शहर में निकलेगी, जिसे देखने के लिए लाखों लोग उमड़ते हैं।
इसके साथ ही मंदिर में भस्म आरती का समय भी बदला गया है। श्रावण में रविवार को रात 2:30 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे, जबकि बाकी दिनों में 3 बजे पट खुलेंगे। आम दिनों में यह समय सुबह 4 बजे होता है, लेकिन श्रावण में भक्तों की संख्या को देखते हुए इसे जल्दी किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा और भीड़ भी संतुलित रहेगी।
उज्जैन में यह पूरी व्यवस्था न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि एक बड़े मैनेजमेंट मॉडल के रूप में भी देखी जा रही है, जहां लाखों लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराना प्राथमिकता है।






