संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने सोमवार को सुनवाई करते हुए संभल प्रशासन के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक मस्जिद में केवल 20 लोगों को नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। कोर्ट ने इसे अनुचित बताते हुए प्रशासन को सभी नमाजियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशासन का काम सुरक्षा देना है, न कि नागरिकों के अधिकारों को सीमित करना। कोर्ट ने कहा कि अगर नमाज पढ़ने में कोई भी व्यक्ति बाधा उत्पन्न करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ये भी पढ़ें
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब संभल जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए एक स्थानीय मस्जिद में 20 से अधिक लोगों के एक साथ नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी। प्रशासन का यह फैसला रमजान के महीने में सामूहिक नमाज की इजाजत मांगने के बाद आया था। इस फैसले के खिलाफ संभल निवासी मुनाजिर खान ने 18 फरवरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर प्रशासन के आदेश को चुनौती दी।
इस मामले की पहली सुनवाई 27 फरवरी को हुई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि प्रशासन का यह कदम मनमाना है और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करता है।
कोर्ट ने लगाई थी डीएम-एसपी को फटकार
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था मुहैया न करा पाने को लेकर संभल के डीएम और एसपी को कड़ी फटकार लगाई थी। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने अधिकारियों की दलीलों पर असंतोष जताते हुए यहां तक कह दिया था कि अगर वे सुरक्षा नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की गई थी। सोमवार को हुई अंतिम सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के विवादित आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया और नमाजियों को पूरी सुरक्षा देने का निर्देश जारी किया। इस फैसले के बाद अब मस्जिद में बिना किसी संख्या सीमा के नमाज अदा की जा सकेगी।