उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में स्थित बाबा नीम करोली की जन्मस्थली अब एक नए रूप में सामने आने जा रही है। जहां अब तक लोग सिर्फ श्रद्धा से आते थे, वहीं अब उन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ एक नया अनुभव मिलेगा।
सरकार इस पवित्र स्थान को एक बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में जुटी है। इसी दिशा में यहां एक भव्य और आधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है, जिसका करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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बाबा नीम करोली जन्मस्थली
बाबा नीम करोली की जन्मस्थली को टूरिस्ट हब बनाने की योजना अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। करीब 8.65 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस कन्वेंशन सेंटर पर अब तक 769 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं।
यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक भवन निर्माण नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य है कि इस जगह को एक ऐसा केंद्र बनाया जाए, जहां श्रद्धालुओं को आस्था के साथ-साथ सुविधा भी मिले। इस परियोजना के अप्रैल 2026 तक पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है, जिसके बाद यहां आने वाले लोगों को एक नया अनुभव मिलेगा।
कन्वेंशन सेंटर में क्या-क्या होंगी सुविधाएं
बाबा नीम करोली जन्मस्थली पर बन रहा यह कन्वेंशन सेंटर पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इसमें मल्टीपर्पज हॉल, सांस्कृतिक ब्लॉक और एक बड़ा एग्जीबिशन हॉल बनाया जा रहा है।
इस एग्जीबिशन हॉल में बाबा नीम करोली के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को दिखाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु उनके जीवन को करीब से समझ सकेंगे।
ग्राउंड फ्लोर पर शौचालय, डाइनिंग हॉल, करीब 50 लोगों की क्षमता वाली कैफेटेरिया और किचन की सुविधा होगी। वहीं पहले फ्लोर पर पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग डॉर्मिटरी बनाई जा रही हैं, जहां लगभग 60 लोग ठहर सकेंगे।
बेहतर कनेक्टिविटी से आसान होगा सफर
इस परियोजना के साथ-साथ क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारने का काम भी किया जा रहा है। करीब 1.77 करोड़ रुपए की लागत से सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यहां तक पहुंचना आसान हो जाएगा। बेहतर सड़क और सुविधाएं इस क्षेत्र को पर्यटन के लिए और आकर्षक बनाएंगी।
आस्था, विकास और रोजगार का संगम
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना सिर्फ धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, बाबा नीम करोली की जन्मस्थली को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं को हर तरह की सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यानी यह योजना आस्था के साथ-साथ विकास का भी प्रतीक बनेगी।