लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षियों पर सीधा और तीखा जुबानी हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों/मुख्य सेविकाओं/सहायिकाओं को स्मार्टफोन और नियुक्ति-पत्र वितरण के मंच से कहा कि, “जो लोग चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, वे गरीब की पीड़ा को नहीं देख सकते, वे मंचों पर भाषण देंगे, लेकिन वे उस पीड़ा के साथ जुड़ नहीं सकते।” उनका यह बयान सोमवार को आंगनवाड़ी केंद्र भवनों व बाल विकास परियोजना कार्यालय भवनों के लोकार्पण/शिलान्यास के महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान आया, जिसने हजारों आंगनवाड़ी कर्मियों के लिए नई उम्मीद जगाई है और प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया है।
इस वृहद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 69 हजार से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सेविकाओं को स्मार्ट फोन वितरित किए। यह डिजिटल पहल उन्हें अपने दैनिक कार्यों को अधिक दक्षता के साथ करने, वास्तविक समय में डेटा प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक बिना किसी देरी के पहुंचाने में मदद करेगी। स्मार्टफोन के माध्यम से वे पोषण ट्रैकर ऐप जैसे उपकरण का उपयोग कर सकेंगी, जो बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और विकास की निगरानी को प्रभावी बनाता है। इसके अतिरिक्त, 2519 आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मुख्य सेविकाओं के रूप में नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जो उनकी सेवाओं की पदोन्नति और मान्यता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी है, जिसमें कोई भेदभाव या भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं है, और उनकी सरकार इसी सिद्धांत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि इस वर्ष 5000 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और 60 हजार से अधिक सहायिकाओं की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है, जिससे जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, साथ ही बाल विकास सेवाओं का विस्तार होगा।
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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विकास की रीढ़ आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां
आंगनवाड़ी कार्यकत्री देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विकास, पोषण सुरक्षा और प्रारंभिक शिक्षा की रीढ़ हैं। उनका काम सिर्फ बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करना ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छह वर्ष से छोटे बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को सुनिश्चित करना भी है। स्मार्टफोन का वितरण उनके काम को आधुनिकता से जोड़ेगा, जिससे वे बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड, टीकाकरण और पोषण संबंधी डेटा को आसानी से ट्रैक कर सकेंगी। यह उन्हें सरकार की पोषण अभियान जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता करेगा, जिससे बच्चों में कुपोषण की दर कम करने में मदद मिलेगी और समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी। यह सुविधा उन्हें प्रशिक्षण मॉड्यूल तक पहुंचने और अपने वरिष्ठों के साथ त्वरित संचार स्थापित करने में भी सक्षम बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को दी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को ‘सामाजिक सुरक्षा की गारंटी’ देने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि इन समर्पित कार्यकत्रियों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना का लाभ भी उपलब्ध कराया गया है। यह कदम उनकी और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जो अक्सर कम आय वाले परिवारों से आती हैं और कठिन परिस्थितियों में काम करती हैं। यह सरकार की ओर से उनके अमूल्य योगदान को पहचानने और उन्हें एक सुरक्षित भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अपने काम को और अधिक समर्पण के साथ कर सकेंगी, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनकी सेवाएँ निर्बाध रूप से जारी रहें।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना
अपने संबोधन में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये सभी जनहित के कार्य, जो आज उनकी सरकार कर रही है, 2017 से पहले भी हो सकते थे। लेकिन पिछली सरकारों के पास इन महत्वपूर्ण कार्यों के लिए ‘फुर्सत’ ही नहीं थी, क्योंकि वे जनहित से अधिक अपने निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देती थीं। सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि गरीब की पीड़ा को केवल वही व्यक्ति समझ सकता है और उसके बारे में गंभीरता से सोच सकता है जिसने खुद गरीबी को करीब से देखा हो या उसे समझा हो। यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से पिछली सरकारों की प्राथमिकताओं और गरीबों के प्रति उनकी कथित उदासीनता पर सवाल उठाती है, जबकि उनकी सरकार को जनहितैषी और गरीब-उन्मुखी बताया गया, जो सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर चलती है।
उन्होंने विपक्ष पर अपने हमले को जारी रखते हुए कहा, “जो लोग चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, वे गरीब की पीड़ा को नहीं देख सकते हैं। वे केवल मंचों पर भाषण देंगे, लेकिन वे उस पीड़ा के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं सकते।” योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनके लिए केवल ‘परिवार ही सबकुछ’ है, और वे समाज के बड़े वर्ग के हितों की अनदेखी करते हैं। मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाए कि विपक्ष को ‘समाज को बांटने के लिए, पर्व और त्योहार के पहले दंगा करवाने के लिए, महिलाओं और व्यापारियों की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले गुंडों की फौज’ चाहिए होती थी। उनके अनुसार, ऐसी सरकारों से जनहित के किसी भी काम की उम्मीद करना ‘स्वप्न जैसा’ था, जो केवल अपनी स्वार्थ सिद्धि और वोट बैंक की राजनीति में लीन रहती थीं। यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में मौजूदा सरकार और विपक्ष के बीच के गहरे वैचारिक मतभेद को दर्शाता है, जहां विकास और सुशासन बनाम परिवारवाद और अराजकता के मुद्दों पर लगातार बहस चलती रहती है, और मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार को स्थिरता और प्रगति का प्रतीक बताया।