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प्रयागराज विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने लखनऊ से सीधी पहल, माघी पूर्णिमा स्नान के लिए रखीं 2 बड़ी शर्तें

Written by:Rishabh Namdev
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मौनी अमावस्या पर हुए विवाद के बाद नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने के लिए लखनऊ के दो बड़े अधिकारी जुटे हैं। शंकराचार्य ने माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान के लिए दोषी अधिकारियों से सार्वजनिक माफी और प्रोटोकॉल बनाने की शर्त रखी है।
प्रयागराज विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने लखनऊ से सीधी पहल, माघी पूर्णिमा स्नान के लिए रखीं 2 बड़ी शर्तें

माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद नाराज होकर काशी लौटे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। अब प्रयागराज प्रशासन की जगह लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारी सीधे शंकराचार्य से संपर्क में हैं और उन्हें माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान के लिए मनाने में जुटे हैं। हालांकि, शंकराचार्य अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ के दो बड़े अधिकारी पिछले दो दिनों से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के संपर्क में हैं। प्रशासन चाहता है कि शंकराचार्य माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर संगम में डुबकी लगाएं, ताकि मेले को लेकर कोई नकारात्मक संदेश न जाए। लेकिन शंकराचार्य ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वह वापस नहीं आएंगे।

ये हैं शंकराचार्य की दो प्रमुख शर्तें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख शर्तें रखी हैं। उनकी पहली और सबसे अहम मांग है कि मौनी अमावस्या पर उनके बटुक शिष्यों के साथ मारपीट और अभद्रता करने वाले दोषी अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनकी दूसरी शर्त चारों पीठों के शंकराचार्यों के स्नान के लिए एक स्थायी प्रोटोकॉल बनाने की है, ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो।

प्रशासन ने शर्तों पर जताई सहमति!

सूत्रों का कहना है कि लखनऊ के अधिकारियों ने शंकराचार्य की इन शर्तों पर सैद्धांतिक सहमति जता दी है। इस सकारात्मक रुख के बाद माना जा रहा है कि विवाद जल्द ही सुलझ सकता है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघी पूर्णिमा स्नान के लिए प्रयागराज लौट सकते हैं। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या था मौनी अमावस्या का विवाद?

यह पूरा विवाद 9 फरवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था। जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों और समर्थकों के साथ पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पालकी के साथ आगे जाने से रोक दिया था। इसी बात पर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया था कि इस दौरान उनके बटुक शिष्यों की चोटी खींचकर उनके साथ मारपीट की गई। इस घटना से आहत होकर उन्होंने बिना स्नान किए ही वापस लौटने का फैसला किया और अपने शिविर के बाहर 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहे। बाद में उन्होंने माघ मेला क्षेत्र छोड़ दिया था और अब काशी में ठहरे हुए हैं।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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