उत्तराखण्ड शासन ने 28 मार्च, 2026 की रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक ‘अर्थ आवर’ मनाने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने सभी नागरिकों से इस एक घंटे के लिए अपने घरों और प्रतिष्ठानों की सभी गैर-जरूरी लाइटें और विद्युत उपकरण बंद रखने की अपील की है। इस वैश्विक पर्यावरणीय पहल में राज्य की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह अभियान विश्व प्रकृति निधि (WWF) इंडिया, नई दिल्ली के एक पत्र के बाद चलाया जा रहा है। सरकार का मकसद प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य के प्रति जागरूकता पैदा करना है। यह कदम राज्य के पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

प्रदेश के सभी नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे निर्धारित समयावधि के दौरान स्वेच्छा से एक घंटे के लिए गैर-जरूरी विद्युत उपकरणों को बंद रखें। इसमें सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान और सरकारी कार्यालय भी शामिल हैं, जहाँ तक संभव हो ऊर्जा की बचत की जाए।

क्या है अर्थ आवर अभियान और इसका महत्व?

अर्थ आवर एक विश्वव्यापी अभियान है जिसकी शुरुआत WWF ने की थी। यह हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करना है। इस अभियान में दुनिया भर के लाखों लोग, व्यवसाय और मशहूर इमारतें एक घंटे के लिए अपनी लाइटें बंद कर देते हैं।

इसकी शुरुआत 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में हुई थी। तब से यह अभियान दुनिया के 190 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में फैल चुका है। यह सिर्फ लाइटें बंद करने का एक प्रतीकात्मक कार्य नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। यह लोगों को याद दिलाता है कि हमारे छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण को बचाने में बड़ा फर्क ला सकते हैं।

उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम पहल

उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए यह पहल खास महत्व रखती है। उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। लेकिन, जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों का असर यहाँ भी दिख रहा है। ग्लेशियरों का पिघलना, मौसम के पैटर्न में बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि जैसी चुनौतियाँ राज्य के सामने हैं। ऐसे में अर्थ आवर जैसे अभियान लोगों को पर्यावरण के प्रति और ज्यादा संवेदनशील बनाने में मदद करते हैं।

राज्य सरकार की यह पहल दर्शाती है कि वह सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। यह कदम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की छवि को एक पर्यावरण-अनुकूल राज्य के रूप में मजबूत करेगा।

गैर-जरूरी लाइटें बंद करने का मतलब है कि वे लाइटें जो सुरक्षा या अत्यावश्यक कार्यों के लिए जरूरी नहीं हैं, उन्हें बंद किया जाए। इसमें सड़कों की लाइटें, अस्पतालों की इमरजेंसी लाइटें या सुरक्षा से जुड़े अन्य उपकरण शामिल नहीं हैं। अपील सिर्फ उन उपकरणों और लाइटों को बंद करने की है जिनका उपयोग उस एक घंटे के लिए टाला जा सकता है।

एक घंटे की पहल से ऊर्जा बचत का बड़ा संदेश

इस एक घंटे के दौरान बिजली बचाने से सीधे तौर पर ऊर्जा की बचत होगी। यह भले ही थोड़े समय के लिए हो, लेकिन यह एक बड़े संदेश का हिस्सा है। यह लोगों को अपने दैनिक जीवन में ऊर्जा दक्षता के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। ऊर्जा बचाने के लिए एलईडी लाइटों का उपयोग, उपकरणों को उपयोग में न होने पर बंद करना और सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को अपनाना कुछ ऐसे कदम हैं जो हर व्यक्ति उठा सकता है।

उत्तराखंड सरकार ने सभी जिलाधिकारियों, विभागों और स्थानीय निकायों को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद है कि प्रदेश के लोग इस पहल का समर्थन करेंगे और 28 मार्च, 2026 की रात को एक घंटे के लिए अपनी लाइटें बंद करके पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएंगे। यह एक सामूहिक प्रयास है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और टिकाऊ ग्रह बनाने में मदद करेगा।