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कॉफी पॉट पर नजर रखने के लिए हुआ था वेबकैम का आविष्कार, जानिए कैसे शुरू हुई डिजिटल युग की लाइव स्ट्रीमिंग

Written by:Shruty Kushwaha
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XCoffee वेबकैम जब इंटरनेट पर लाइव हुआ तो यह दुनिया भर में इतना पॉपुलर हो गया कि लोग सिर्फ कॉफी पॉट की फीड देखने के लिए लॉग इन करते थे। उस समय इंटरनेट इतना नया था कि एक साधारण कॉफी पॉट की लाइव स्ट्रीम भी लोगों के लिए जादू जैसी थी। आज यकीन करना मुश्किल हो लेकिन सच यही है कि उस समय कुछ लोग सिर्फ इसे देखने के लिए रात-रात भर जागते थे..ये सोचकर कि कब कोई कॉफी लेने आएगा।
कॉफी पॉट पर नजर रखने के लिए हुआ था वेबकैम का आविष्कार, जानिए कैसे शुरू हुई डिजिटल युग की लाइव स्ट्रीमिंग

AI generated

आज के डिजिटल युग में वेबकैम हमारी ज़िंदगी का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है जिसके बिना काम, पढ़ाई और दोस्तों से गपशप अधूरी सी लगती है। ज़ूम कॉल्स हो, ऑनलाइन क्लासेस, वर्चुअल मीटिंग्स या फिर फैमिली वीडियो चैट..वेबकैम हर जगह छाया हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस छोटे-से डिवाइस की शुरुआत एक कॉफी पॉट की निगरानी से हुई थी?

जी हाँ, ये कोई मज़ाक नहीं बल्कि तकनीक की दुनिया का सबसे मज़ेदार सच है। अब वेबकैम के बारे में तो हम सभी जानते हैं। ये एक छोटा डिजिटल कैमरा होता है जो कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन से जुड़कर वीडियो या तस्वीरें कैप्चर करता है।  इंटरनेट के जरिए इसका इस्तेमाल लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग, वीडियो कॉल, ऑनलाइन मीटिंग्स या कंटेंट क्रिएशन के लिए भी किया जाता है। लेकिन आज हम आपको इसकी एकदम शुरुआती कहानी बताने जा रहे हैं।

कॉफी ने लिखा वेबकैम का इतिहास

क्या आप यकीन करेंगे कि दुनिया का पहला वेबकैम सिर्फ़ एक कप कॉफी के लिए बनाया गया था? आज हम आपको ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप न सिर्फ़ चौंकेंगे बल्कि मुस्कुरा भी उठेंगे। विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक ऐसा रोचक तथ्य छिपा है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। दुनिया का पहला वेबकैम सिर्फ इसलिए बनाया गया था ताकि कॉफी खत्म न हो।

बात है 1991 की..जब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रोजन रूम में वैज्ञानिकों को बार-बार कॉफी पॉट तक जाकर निराशा का सामना करना पड़ता था। कंप्यूटर लैब में वैज्ञानिकों को ये एक अजीब समस्या सता रही थी। वे कॉफी पॉट तक जाते और  बार-बार खाली बर्तन देखकर निराश लौट आते। काम में डूबे इन जीनियस दिमागों को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि कॉफी की तलाश में उठकर किचन तक जाएं और वहां निराशा ही मिले। बस यहीं से शुरू हुआ एक आविष्कार, जिसने तकनीकी इतिहास रच दिया।

ऐसे बना कॉफीपॉट वेबकैम

कॉफी खत्म होने की इस रोज़ की मुसीबत से तंग आकर वैज्ञानिक क्वेंटिन स्टाफर्ड फ्रेजर और पॉल जार्डेट्स्की ने एक अनोखा रास्ता निकाला। उन्होंने एक पुराने डिजिटल कैमरे को कॉफी पॉट के सामने सेट किया और उसे लैब के कंप्यूटर नेटवर्क से जोड़ दिया। अब हर मिनट में कॉफी पॉट की तस्वीर अपडेट होती थी और वैज्ञानिक अपनी सीट से ही देख सकते थे कि पॉट में कॉफी बची है या नहीं। 1993 में इस सेटअप को इंटरनेट से जोड़ा गया और यह दुनिया का पहला वेबकैम बन गया, जिसे “XCoffee” नाम मिला। पूरी दुनिया इस कॉफी पॉट की लाइव फीड देख सकती थी। यह छोटा-सा आविष्कार 2001 तक चला, और इसने वेबकैम की नींव रख दी।

वेबकैम की बदलती दुनिया

आज के डिजिटल युग में वेबकैम सिर्फ कॉफी देखने की मशीन भर नहीं रहा, बल्कि यह हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। चाहे आप घर से मीटिंग कर रहे हों, ऑनलाइन योगा क्लास जॉइन कर रहे हों या दूर बैठे परिवार से वीडियो कॉल पर गप्पें मार रहे हो..वेबकैम ने सब कुछ कितना आसान कर दिया है।

कोविड महामारी के बाद तो वेबकैम ने ऑफिस की दुनिया को ही बदलकर रख दिया। जूम, गूगल मीट और माइक्रोसॉफ्ट टीमें जैसे प्लेटफॉर्म्स ने वेबकैम को हर पेशेवर की मेज़ का हिस्सा बना दिया है। ऑनलाइन क्लासेस और वर्चुअल लेक्चर्स ने स्टूडेंट्स और टीचर्स को वेबकैम के ज़रिए जोड़ा। त्योहारों पर परिवार से वीडियो कॉल हो या दोस्तों के साथ वर्चुअल गेम नाइट..वेबकैम ने दूरियों को मिटा दिया। इसी के साथ यूट्यूबर्स, टिकटॉकर्स और लाइव स्ट्रीमर्स के लिए हाई-क्वालिटी वेबकैम्स ने कंटेंट क्रिएशन को अगले स्तर पर पहुँचाया है। लेकिन अगली बार जब आप अपने वेबकैम को ऑन करें ज़रा उस कॉफी पॉट को याद कर लीजिए, जिसने तीस साल पहले इस छोटे से डिवाइस की नींव रखी थी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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