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भोपाल में शहर काजी की बीमारी को लेकर फतवा जारी, प्रोस्टेट मरीज नहीं कर सकते इमामत, बुलाई गई अहम बैठक

Written by:Ankita Chourdia
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भोपाल में एक फतवा जारी होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है जिसमें कहा गया है कि पेशाब टपकने जैसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति इमामत नहीं कर सकता। हालांकि फतवे में किसी का नाम नहीं है, लेकिन इसे शहर काजी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे मुस्लिम समुदाय में मतभेद उभर आए हैं और एक अहम बैठक बुलाई गई है।
भोपाल में शहर काजी की बीमारी को लेकर फतवा जारी, प्रोस्टेट मरीज नहीं कर सकते इमामत, बुलाई गई अहम बैठक

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक धार्मिक फतवे ने मुस्लिम समुदाय में बड़ी बहस छेड़ दी है। यह फतवा एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है जो प्रोस्टेट की बीमारी से पीड़ित है और उसे पेशाब की बूंदें आने की समस्या है। फतवे के अनुसार, ऐसा व्यक्ति खुद तो नमाज़ पढ़ सकता है, लेकिन वह दूसरों को नमाज़ नहीं पढ़ा सकता, यानी इमामत नहीं कर सकता।

यह मामला तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस फतवे को सीधे भोपाल के शहर काजी से जोड़कर प्रचारित करना शुरू कर दिया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इस विवाद के चलते मुस्लिम समुदाय दो खेमों में बंटा हुआ नजर आ रहा है और मामले पर चर्चा के लिए धर्मगुरुओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है।

फतवे में क्या कहा गया है?

यह फतवा भोपाल की ‘जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी’ के दारुल इफ्ता (इस्लामी कानून से जुड़े सवालों का जवाब देने वाली संस्था) की ओर से जारी किया गया है। इसमें भोपाल के पीरगेट निवासी सहेल अली द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया गया है। सवाल था कि अगर किसी शहर के काजी साहब को प्रोस्टेट की बीमारी हो और उन्हें पेशाब की बूंदें आने की समस्या हो, तो क्या उनके पीछे नमाज़ पढ़ना जायज़ है?

इसके जवाब में फतवे में कहा गया है कि शरीयत (इस्लामी कानून) में ऐसे व्यक्ति को ‘माज़ूर’ माना जाता है। इस स्थिति में वह व्यक्ति खुद की नमाज़ तो अदा कर सकता है, लेकिन वह इमाम बनकर फर्ज़ नमाज़ नहीं पढ़ा सकता। फतवे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति ने ऐसे इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ ली है, तो उसे अपनी नमाज़ दोहरानी होगी।

किसने जारी किया फतवा?

दस्तावेज़ के अनुसार, यह फतवा 9 मार्च 2026 को नायब मुफ़्ती सैयद अहमद खान कासमी द्वारा जारी किया गया है और इस पर मुफ़्ती-ए-शहर भोपाल की मुहर भी लगी है। हालांकि, पूरे दस्तावेज़ में भोपाल के मौजूदा शहर काज़ी का कहीं भी नाम नहीं लिया गया है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के फतवे अक्सर शरई नियमों को स्पष्ट करने के लिए जारी किए जाते हैं और जरूरी नहीं कि वे किसी विशेष व्यक्ति को लक्षित करें।

“शहर काजी की बीमारी और नमाज को लेकर फतवा वायरल हुआ है। मुस्लिम धर्म गुरु और अन्य जानकारों के साथ बैठक होगी।” — शमशुल हसन, संरक्षक, ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी

विवाद के बाद बुलाई गई बैठक

इस फतवे के सोशल मीडिया पर वायरल होने और इसे शहर काजी से जोड़े जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने बताया कि इस बैठक में सभी मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है ताकि इस मुद्दे पर चर्चा कर भ्रम को दूर किया जा सके।

Ankita Chourdia
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