Hindi News

बिजली कटौती और खाद की भारी किल्लत से गुस्साए किसानों ने किया चक्काजाम, प्रशासन पर लगाये आरोप

Reported by:Hitendra Budholiya|Edited by:Atul Saxena
Published:
खास बात ये है कि किसानों का यह प्रदर्शन उस समय किया गया है जब जिले में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एवं प्रभारी मंत्री के आने की तैयारी चल रही है।
बिजली कटौती और खाद की भारी किल्लत से गुस्साए किसानों ने किया चक्काजाम, प्रशासन पर लगाये आरोप

Farmers’ Chakka Jam Ashoknagar

अशोकनगर जिले के ईसागढ़ रोड स्थित तरावली चौराहे पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बड़ी संख्या में स्थानीय किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली और वाहनों के साथ सड़क पर उतर आए। आक्रोशित किसानों ने बिजली कटौती और खाद की भारी किल्लत को लेकर चक्काजाम कर दिया, जिससे मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस जाम से न केवल अशोकनगर एवं ईसागढ़ का मार्ग बंद हुआ बल्कि आसपास के गांव में जाने वाले मार्गों पर भी किसानों ने जाम लगा दिया।

किसानों ने बताया कि क्षेत्र में बिजली और खाद की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले भी संबंधित विभाग के कार्यालय में जाकर लिखित ज्ञापन सौंपा था। उस दौरान अधिकारियों द्वारा जल्द ही समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन के इसी अड़ियल रवैये से नाराज होकर किसानों को प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा।

किसान बोले रात को केवल 2 घंटे मिल रही बिजली 

किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि इस भीषण गर्मी में उन्हें रात के समय केवल दो से तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है। वह बिजली भी लगातार न मिलकर टुकड़ों में कट-कट कर दी जा रही है। एक घंटा बिजली देने के बाद कटौती कर दी जाती है, फिर कुछ देर बाद देकर दोबारा काट दी जाती है। इस आँख-मिचौली के कारण ग्रामीण इलाकों में रात काटना दूभर हो गया है और कृषि कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। इसके अलावा आगामी फसलों के लिए खाद की जो व्यवस्था की गई है उससे भी किसान नाराज है उनका कहना है की समुचित खाद किसानों को नहीं मिल पा रहा।

चिलचिलाती धूप में भी अपनी मांगों पर अडिग किसान 

किसानों का कहना है कि चक्काजाम की सूचना प्रशासन को पहले ही दी गई थी, उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग को दिए गए पिछले ज्ञापन में ही इस बात की चेतावनी दे दी गई थी, कि यदि समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने पर मजबूर होंगे। चक्काजाम कर रहे और किसान अपनी माँगों पर अड़े हुए थे। वे मौके पर ही वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाकर ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
Follow Us :GoogleNews