वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हर एक ग्रह एक निश्चित समय अंतराल के बाद राशि बदलता है, जिससे योग-राजयोग का निर्माण होता है। इसी क्रम में होली से पहले ग्रहों के राजा सूर्य, ग्रहों के राजकुमार बुध और दैत्यों के गुरु शुक्र ने मिलकर दो बड़े राजयोग का निर्माण किया है। यह राजयोग शनि की राशि कुंभ में बने हैं। वर्तमान में आत्मा-पिता के कारक सूर्य , प्रेम व सौंदर्य के कारक शुक्र और बुद्धि व व्यापार के दाता बुध कुंभ राशि (दृक पंचांग के अनुसार) में विराजमान हैं।
इससे सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य राजयोग और शुक्र व सूर्य की युति से शुक्रादित्य राजयोग का निर्माण हुआ है।हालांकि बुधादित्य का प्रभाव 15 मार्च 2026 तक रहेगा, क्योंकि इसके बाद सूर्य मीन राशि में गोचर कर जाएंगे। शुक्रादित्य का प्रभाव 2 मार्च तक रहेगा, क्योंकि इस दिन शुक्र मीन राशि में प्रवेश करेंगे। वैसे तो डबल राजयोग सभी राशियों के जातकों पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा, लेकिन 3 राशि वालों को विशेष फल प्रदान कर सकता है। आइए जानते हैं कि ये तीन भाग्यशाली राशियां कौन सी हैं?
तुला राशि पर प्रभाव
- डबल राजयोग जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है।
- अविवाहित लोगों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं।
- आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति के प्रबल योग हैं।
- आर्थिक स्थिति बेहतर और मजबूत हो सकती है।
- इस अवधि में संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
- समाज में मान-सम्मान में वृद्धि होने की संभावना है।
- प्रेम संबंधों में सफलता मिलने के संकेत हैं।
- व्यापार में मुनाफे के साथ नई डील मिलने के योग हैं।
मेष राशि पर प्रभाव
- नौकरीपेशा लोगों को नई नौकरी के लिए प्रस्ताव मिल सकते हैं।
- लंबे समय से रुका और अटका काम पूरा हो सकता है।
- करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
- आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- आय में वृद्धि के प्रबल योग बनेंगे। आय के नए-नए स्त्रोत खुल सकते हैं।
- इस अवधि में परिवार और किस्मत का साथ मिलेगा।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है।
- आयात-निर्यात के का काम करने वाले व्यापारियों के लिए समय उत्तम रहेगा।
मकर राशि पर प्रभाव
- डबल राजयोग के लिए फलदायी साबित हो सकता है।
- व्यापार में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं।
- स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल सकता है।
- पार्टनरशिप में किए गए व्यापार से जबरदस्त लाभ मिल सकता है।
- समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है।
- जीवन में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं।
- नौकरीपेशा को कोई अच्छी खबर मिल सकती हैं।
- पारिवारिक जीवन खुशनुमा रहने के योग हैं।
कब बनता है बुधादित्य और शुक्रादित्य राजयोग
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आदित्य का मतलब सूर्य से होता है। यह राजयोग कुंडली में सूर्य और बुध के एक ही भाव (राशि) में एक साथ होने पर बनता है। यह राजयोग कुंडली के जिस भाव में मौजूद रहता है, उसे वह मजबूत बना देता है। कुंडली में बुध और सूर्य के एक साथ होने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। धन, सुख-सुविधा, वैभव, उच्च पद और मान-सम्मान और करियर में तरक्की मिलती है।
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्रादित्य राजयोग सूर्य और शुक्र की युति या विशेष संयोग से बनता है। आदित्य का मतलब सूर्य से होता है, इस तरह से जब कुंडली में सूर्य और शुक्र दोनों ग्रह एक साथ एक राशि में मौजूद हों तो शुक्रादित्य राजयोग बनता है। इस राजयोग से जातकों को विशेष फल, धन, सफलता, सुख-सुविधा, वैभव और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। यह विशेष रूप से उन राशियों पर सकारात्मक असर डालता है, जिनकी कुंडली में सूर्य और शुक्र अनुकूल स्थिति में होते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






