विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल (West Bengal Election) में वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों तबादला से संबंधित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया है। निवासियों ने अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी थी। जिस पर SC ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। कोर्ट का कहना है कि इस तरह के तबादले सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और किसी दखल की जरूरत नहीं होती। हालांकि कोर्ट ने यह माना कि राज्य से सलाह लिए बिना ट्रांसफर करने का कानूनी सवाल महत्वपूर्ण है। चुनाव के पहले चरण को देखते हुए कोर्ट याचिका पर सुनवाई करने के पक्ष में नहीं है।
याचिका में इन मुद्दों का उल्लेख
अर्का कुमार नाग द्वारा याचिका में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक सहित ,कई प्रमुख अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों का विरोध किया गया है। इससे पश्चिमी अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर अन्य राज्यों में भेजे जाने की चर्चा भी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि राज्य सरकार से अनिवार्य परामर्श किए गए अधिकारियों के तबादले किए गए थे। जिससे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उल्लंघन होता है। उन्होंने कहा कि, “मुख्य सचिव सहित अधिकारियों का व्यापक फेरबदल अचानक किया गया और इससे प्रशासनिक व्यवस्था बाधित हुई।” हालांकि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि स्वतंत्रता निष्पक्ष चुनाव को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के बाहर से भी अधिकारियों की तैनाती की जाती है, यह सामान्य बात है। इसलिए राज्य में चुनाव से पहले ईसीआई द्वारा अफसरों के तबादले बरकरार रहेंगे।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
चुनाव आयोग द्वारा आईएएस और आईपीएस के तबादले को लेकर एक याचिका PIL के तौर पर दायर की गई थी। जिसे कुछ दिन पहले ही कोलकाता हाई कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने टिप्पणी दी थी कि, “बड़ी संख्या में अधिकारियों का ट्रांसफर अपने आप में मनमानी ढंग से किसी गलत इरादे से किया गया है नहीं माना जा सकता।” जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया।






