लोकसभा में 16 अप्रैल 2026, गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से तीन महत्वपूर्ण बिल ( महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026) पेश किए गए हैं। इन प्रस्तावों के तहत वर्ष 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। सदन में परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान काफी हंगामा भी देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि ये बिल चुनावी फायदे के लिए गलत तरीके से लाया जा रहा है। तो वहीं अखिलेश यादव ने भी भाजपा सरकार को जनगणना के मुद्दे पर घेरा और गंभीर आरोप लगाए।
हंगामे के बीच महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने सदन में सभी राजनीतिक दलों से विधेयक का समर्थन करने की अपील की। पीएम मोदी ने सीधे तौर पर कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंंने कहा, इस सदन में हम सभी के पास इस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का शुभ अवसर है।
पीएम मोदी ने कहा, यह देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और हम सभी खुद को भाग्यशाली मान सकते हैं कि इस परिवर्तन के दौर के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, हमें श्रेय नहीं चाहिए। जैसे ही यह पास हो जाएगा, मैं कल सबको धन्यवाद देते हुए श्रेय देने को तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने को तैयार हूं। श्रेय ले लो आप जो भी फोटो छपवाना चाहते हैं, मैं सरकारी खर्चे पर छपवाने को तैयार हूं।
परिसीमन पर स्थिति स्पष्ट, अनुपात में नहीं होगा बदलाव- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि पिछली जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा, और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। क्योंकि अगर नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, हम सांसदों को यह ज़रूरी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। हम सब मिलकर देश को एक नई दिशा देने जा रहे हैं। हम अपने शासन प्रणाली में संवेदनशीलता लाने की अच्छी कोशिश करने जा रहे हैं। इससे न सिर्फ़ देश की राजनीति बनेगी, बल्कि देश की दिशा और दशा भी तय होगी।
पीएम मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर दिया जोर
पीएम मोद ने कहा कि 21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। हम सभी आज दुनिया में भारत की पहचान महसूस कर रहे हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का पल है। मेरा मानना है कि ‘विकसित भारत’ का मतलब सिर्फ़ रेलवे, सड़क, आधारभूत संरचना, या आर्थिक या तरक्की के आंकड़े नहीं हैं। हम ‘विकसित भारत’ के इतने सीमित नज़रिए वाले लोग नहीं हैं। हम एक ऐसा ‘विकसित भारत’ चाहते हैं, जहां नीति- निर्माण सही मायने में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को अपनाए। यह समय की मांग है कि देश की 50% आबादी नीति- निर्माण का हिस्सा बने।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ़ नहीं करेगी। मेरी आप सबसे अपील है कि इसको राजनीति के तराजू से मत तोलिए, ये राष्ट्रहित का निर्णय है। 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना और उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगा, इसलिए ये राजनीतिक मुद्दा नहीं बना।
पीएम मोदी ने आगे कहा, समय की मांग है कि हमें और देर नहीं करनी चाहिए। इस बीच, राजनीतिक पार्टी के सदस्यों, जानकार लोगों और कार्यकर्ता के तौर पर काम करने वालों से बातचीत हुई है। कुछ लोगों ने तो अपने सुझाव भी दिए हैं। इसमें से कुछ कमियां दूर करनी होंगी। ताकि हम अपनी माताओं और बहनों की शक्ति को एक कर सकें।
क्या है परिसीमन बिल 2026?
केंद्र सरकार ने सदन में परिसीमन बिल 2026 पेश किया है। इसके तहत संविधान संशोधन के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए, 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि सरकार ने तीनों बिल केवल लोकसभा में ही पेश किए हैं। राज्यसभा में पेश नहीं हुए हैं।
राज्यसभा में कब पेश होंगे तीनों बिल?
जानकारी अनुसार, जो तीनों बिल लोकसभा में पेश हुए हैं इसके लिए 17 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा के बाद तीनों बिलों पर मतदान होगा तो वहीं अगर राज्यसभा की बात करें तो यह तीनों बिल 18 अप्रैल को पेश किए जाएंगे। इसके बाद 10 घंटे तक चर्चा के बाद उसी दिन तीनों बिल के लिए वोटिंग कराई जाएगी।
Speaking in the Lok Sabha. https://t.co/AsiBPaaoEg
— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026





