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डबरा : लोकसेवा केंद्र का कारनामा, मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदन पर बना दिया जन्म प्रमाणपत्र, जिम्मेदार बोले – गलतियाँ हो जाती हैं

Reported by:Arun Rajak|Edited by:Atul Saxena
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नायब तहसीलदार संजय अगरिया ने इसे लोक सेवा केंद्र के कर्मचारियों पर डालते हुए कहा कि “गलती वहीं से हुई है, तो लोक सेवा केंद्र संचालक बोले ये सामान्य बात, ऐसी गलतियां काम करने वालों से हो जाती हैं।
डबरा : लोकसेवा केंद्र का कारनामा, मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदन पर बना दिया जन्म प्रमाणपत्र, जिम्मेदार बोले – गलतियाँ हो जाती हैं

Dabra Lok Seva Kendra

ग्वालियर जिले की डबरा तहसील स्थित लोक सेवा केंद्र से हैरान करने वाली और बड़ी लापरवाही सामने आई है। ग्राम महाराजपुर दफाई निवासी आवेदक मुन्नी बाई आदिवासी ने अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों की अनदेखी के चलते उनके नाम से जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

आवेदक के अनुसार, वे कई बार मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर चुकी थीं और अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं। इस बार भी उम्मीद थी कि काम हो जाएगा, लेकिन जो प्रमाण पत्र मिला, वह पूरी तरह उल्टा था। यह घटना बताती है कि लोक सेवा केंद्रों में आवेदनों की जांच किस स्तर पर की जा रही है।

 लोकसेवा केंद्र की गलती बता रहे नायब तहसीलदार

इस मामले में जब छीमक के नायब तहसीलदार संजय अगरिया से एमपी ब्रेकिंग के संवाददाता द्वारा दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने जिम्मेदारी सीधे लोक सेवा केंद्र के कर्मचारियों पर डालते हुए कहा कि “गलती वहीं से हुई है, एवं प्रमाण पत्र में सुधार कर दिया गया है। वहीं लोक सेवा केंद्र संचालक महेंद्र राय ने भी इसे सामान्य मानते हुए कहा, ऐसी गलतियां काम करने वालों से हो जाती हैं, आवेदक को सुधार कर संतुष्ट कर दिया गया है और इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

गंभीर चूक को ‘साधारण गलती’ बताकर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार 

इन बयानों से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी इस गंभीर चूक को ‘साधारण गलती’ बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। सवाल यह है कि जब मृत्यु और जन्म जैसे संवेदनशील दस्तावेजों में ऐसी लापरवाही हो सकती है, तो आम नागरिकों के अन्य दस्तावेज कितने सुरक्षित हैं?

आवेदक के लिए यह सिर्फ एक ‘त्रुटि’ नहीं, बल्कि कई दिनों की भागदौड़, समय और मानसिक परेशानी का मामला है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर ठोस कार्रवाई करता है या ‘सुधार कर दिया’ कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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