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माफिया की दबंगई, कहां है माइनिंग विभाग? दूसरे जिले की रॉयल्टी पर ग्वालियर में दौड़ रहे रेत के डंपर!

Reported by:Arun Rajak|Edited by:Atul Saxena
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हैरानी की बात यह भी है कि रेत खनन और परिवहन से जुड़े लगातार विवादों एवं शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार माइनिंग अधिकारी मौन हैं।

ग्वालियर जिले के डबरा और पिछोर क्षेत्र में रेत परिवहन को लेकर एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने रेत खनन व्यवस्था, माइनिंग विभाग की निगरानी और रेत ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिन घाटों से रेत का खनन और परिवहन किया जा रहा है, वहां से वैध दस्तावेजों के बजाय दूसरे जिले की रॉयल्टी जारी कर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।

ग्राम तोड़ा निवासी डंपर मालिक लोकेन्द्र यादव ने पिछले दिनों पिछोर थाने में शिकायती आवेदन देकर बताया कि उसके डंपर में निर्धारित नियमों के अनुसार रेत भरकर जा रही थी और वाहन में ओवरलोडिंग भी नहीं थी, इसके बावजूद छपरा नाके पर उसकी गाड़ी को रोक लिया गया जबकि अन्य वाहनों को बिना जांच के निकलने दिया गया, दबंग केवल चुनिंदा वाहन चालकों पर दबाव बनाते हैं।

माइनिंग विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में

डंपर चालक और मालिक का आरोप है कि रेत का खनन एक क्षेत्र से किया जा रहा है, लेकिन दस्तावेज और रॉयल्टी किसी दूसरे जिले की दिखाई जा रही है। जानकारों के अनुसार ऐसा होना खनिज नियमों के विपरीत माना जाता है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि यदि यह सब लंबे समय से चल रहा था तो माइनिंग विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

शासन को हो रहा राजस्व का बड़ा नुकसान 

फरियादी ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उसने इस कथित अनियमितता पर सवाल उठाए तो उसे धमकियाँ दी गईं और वाहन चढ़ाने तक की बात कही गई।  सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अवैध रेत खनन, परिवहन और दूसरे जिले की रॉयल्टी के इस कथित खेल में केवल ठेकेदार ही शामिल हैं या फिर जिम्मेदार विभागों की भी कहीं न कहीं अनदेखी अथवा संलिप्तता है? यदि एक जिले की रेत दूसरे जिले की रॉयल्टी पर परिवहन हो रहा है, तो इससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचना निश्चित है।

माइनिंग अफसर न दफ्तर में मिले ना फोन उठाया 

हैरानी की बात यह भी है कि रेत खनन और परिवहन से जुड़े लगातार विवादों एवं शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार माइनिंग अधिकारी मौन हैं। जब इस पूरे मामले में पक्ष जानने और आधिकारिक प्रतिक्रिया लेने के लिए हमारे संवाददाता द्वारा संबंधित माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो न तो वे अपने कार्यालय में उपलब्ध मिले और न ही उनके मोबाइल फोन पर संपर्क हो सका। ऐसे में अवैध खनन और संदिग्ध रॉयल्टी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग की चुप्पी भी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते माइनिंग विभाग सक्रिय भूमिका निभाता, तो शायद इस प्रकार के आरोप सामने ही नहीं आते।

SDM बोले- जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी 

इस पूरे मामले पर डबरा एसडीएम रूपेश सिंघई  ने कहा कि ग्वालियर जिले में संचालित रेत परिवहन के लिए किसी अन्य जिले की रॉयल्टी जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। मामला मीडिया के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है इसकी जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें माइनिंग विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या अवैध खनन, संदिग्ध रॉयल्टी और कथित मिलीभगत के इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह आने वाला समय तय करेगा।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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