उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी से यूपीडा विभाग वापस ले लिया है। अब उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी UPIDA का पूरा काम मुख्यमंत्री खुद देखेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेश में इस बदलाव की पुष्टि की गई है।
दरअसल सरकार ने एक्सप्रेसवे और बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। आदेश के मुताबिक, अब यूपीडा से जुड़े सभी कार्य अवस्थापना विकास अनुभाग को सौंपे जाएंगे। यह विभाग पहले से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है। इस फैसले के बाद गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के तहत होगी।
अब नंद गोपाल के पास कौन से विभाग बचे?
वहीं नंद गोपाल गुप्ता नंदी उत्तर प्रदेश सरकार में लंबे समय से अहम विभाग संभाल रहे थे। दरअसल उनके पास औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई और यूपीडा जैसे बड़े विभाग थे। अब यूपीडा का कार्यभार उनसे वापस ले लिया गया है। हालांकि उनके पास अभी भी औद्योगिक विकास विभाग, निर्यात प्रोत्साहन विभाग और एनआरआई विभाग मौजूद रहेंगे।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि एक्सप्रेसवे परियोजनाओं और अवस्थापना विकास से जुड़े कामों को एक ही विभाग के अंतर्गत लाने से फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही परियोजनाओं की निगरानी और समन्वय में भी आसानी होगी। यूपी में इस समय कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें गंगा एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे शामिल हैं।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
दरअसल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले पर बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए नंद गोपाल गुप्ता नंदी से यूपीडा विभाग वापस लेने पर तंज कसा। अखिलेश यादव ने लिखा कि जब एक्सप्रेसवे बन गए और भ्रष्टाचार का टारगेट पूरा हो गया, तब विभाग हटाया गया।
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा कि अभी “हाफ” हुए हैं और आगे विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर “साफ” हो जाएंगे। अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए और सरकार पर निशाना साधा।






