अप्रैल 2026 में ग्रहों का महागोचर होने वाला है। इस महीने शुक्र, सूर्य, मंगल, बुध और चंद्रमा चाल बदलेंगे। इसमें ग्रहों के राजकुमार बुध का गोचर बेहद अहम होने वाला है, क्योंकि 11 अप्रैल 2026 से सूर्य और बुध की मीन (देव गुरु बृहस्पति की राशि) राशि में युति होगी और ‘बुधादित्य राजयोग’ का निर्माण होगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में आत्मा व पिता के कारक सूर्य मीन राशि में विराजमान हैं। 11 अप्रैल को संचार, बुद्धि व व्यापार के दाता बुध भी मीन राशि (दृक पंचांग के अनुसार) में प्रवेश करेंगे। बुधादित्य राजयोग का प्रभाव 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा, क्योंकि इसके बाद सूर्य मेष राशि में गोचर कर जाएंगे। वैसे तो इस राजयोग का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलेगा, लेकिन 3 राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ सकता है। आइए जानते हैं इन भाग्यशाली राशियों के बारे में…

मीन राशि पर प्रभाव

  • आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
  • आय के नए-नए स्त्रोत खुल सकते हैं।
  • व्यक्तित्व में निखार आ सकता है।
  • इस अवधि में परिवार और किस्मत का साथ मिलेगा।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि देखने को मिल सकती है ।
  • नौकरीपेशा को नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है।
  • व्यापारियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं।

वृषभ राशि पर प्रभाव

  • लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं।
  • समाज में मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है।
  • संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है।
  • धार्मिक या आध्यात्मिक यात्रा के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी।
  • आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
  • स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल सकता है।

मिथुन राशि पर प्रभाव

  • बुधादित्य राजयोग जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है।
  • करियर में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं।
  • आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है।
  • व्यापार में मुनाफे के साथ धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है।
  • आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि हो सकती है।
  • समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है।
  • जीवन में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं।

कब बनता है बुधादित्य राजयोग

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आदित्य का मतलब सूर्य से होता है। यह राजयोग कुंडली में सूर्य और बुध के एक ही भाव (राशि) में एक साथ होने पर बनता है। यह राजयोग कुंडली के जिस भाव में मौजूद रहता है, उसे वह मजबूत बना देता है। कुंडली में बुध और सूर्य के एक साथ होने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। धन, सुख-सुविधा, वैभव, उच्च पद और मान-सम्मान और करियर में तरक्की मिलती है। कहा जाता है कि जब ये दोनों किसी राशि के प्रथम भाव (लग्न) में मिलते हैं, तो यह व्यक्तित्व और भाग्य में चार चाँद लगा देता है।

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)