आज सोमवार को ग्रहों के सेनापति मंगल और चंद्रमा मिलकर ‘महालक्ष्मी राजयोग’ बनाने जा रहे हैं। यह राजयोग शनि की राशि कुंभ में बनेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, वर्तमान में साहस, शक्ति और ऊर्जा के कारक माने जाने वाले मंगल कुंभ राशि में विराजमान है। 16 मार्च 2026 को मन व धन के कारक कहे जाने वाले चंद्रमा (दृकपंचांग के अनुसार) भी कुंभ राशि (6:13 PM) में गोचर करने जा रहे हैं, जिससे मंगल व चंद्रमा की युति होगी और महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा।
मंगल और चंद्रमा की यह युति कुंभ राशि में अगले ढाई दिनों तक (18 मार्च की देर रात तक) बनी रहेगी। ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण बनने वाला यह राजयोग धन, समृद्धि और करियर में उन्नति के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इससे मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। वैसे तो इसका सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा लेकिन 3 राशियों को विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं इन राशियों के बारे में…
मिथुन राशि पर प्रभाव:
- साझेदारी में किए गए व्यापार से लाभ मिलने की प्रबल संभावना है।
- करियर में नए अवसर मिल सकते हैं।
- नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति के साथ वेतन वृद्धि का तोहफा मिल सकता हैं।
- लंबे समय से रुके हुए कामों को गति मिल सकती है।
- इस अवधि में भाग्य का साथ मिल सकता है।
- आय में वृद्धि के साथ नए-नए स्रोत बनने के प्रबल योग हैं।
- देश- विदेश की यात्रा पर जा सकते हैं।
वृषभ राशि पर प्रभाव:
- कार्यक्षेत्र में तरक्की और नए अवसर मिलने के योग हैं।
- अचानक धन प्राप्ति के भी प्रबल संकेत हैं।
- पुराने निवेश से लाभ मिलने के लिए परिस्थितियां अनुकूल रह सकती है।
- नया व्यवसाय शुरू करने के लिए समय अनुकूल रहेगा।
- इस अवधि में पैतृक संपत्ति से लाभ मिल सकता है।
- नौकरीपेशा को नए अवसर मिल सकते हैं।
- भौतिक सुख-साधनों में वृद्धि होने की संभावना है।
- नौकरीपेशा को पदोन्नति के साथ वेतनवृद्धि का तोहफा मिल सकता है।
वृश्चिक राशि पर प्रभाव:
- व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।
- आर्थिक रुप से मजबूत हो सकते ।
- समाज में मान सम्मान बढ़ेगा।
- आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होने के प्रबल योग हैं।
- शादीशुदा लोगों का वैवाहिक जीवन शानदार रह सकता है।
- नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
- लंबे समय से अटका या फंसा हुआ धन मिल सकता है।
कब बनता है महालक्ष्मी राजयोग
- वैदिक ज्योतिष में महालक्ष्मी राजयोग को सबसे शुभ माना जाता है। जब मंगल और चंद्रमा एक साथ शुभ भावों में हों तो यह राजयोग बनता है। मान्यता है कि मंगल और चंद्रमा की युति जब कुंडली में द्वितीय, नवम, दशम और एकादश भाव में हो रही हो तब अपार धन लाभ देता है।
- माना जाता है कि इस राजयोग के बनने से व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। जीवन में अपार सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। समाज में मान-सम्मान मिलता है और पद-प्रतिष्ठा दिलाता है। मंगल को ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है, जबकि चंद्रमा मन और धन के प्रवाह का कारक है। इन दोनों का साथ आना आर्थिक मजबूती के द्वार खोलता है।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य वैदिक ज्योतिष मान्यताओं/पंचांग-आधारित गोचर गणना पर तैयार की गई है। व्यक्ति-विशेष पर परिणाम जन्मकुंडली, लग्न और दशा पर निर्भर करते हैं। MP Breaking News किसी भी भविष्यवाणी/दावे की गारंटी नहीं देता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






