Malavya And Ruchak Rajyog: ग्रहों के सेनापति मंगल को साहस, शक्ति और ऊर्जा का कारक माना जाता है। मंगल को मेष वृश्चिक राशि का स्वामित्व प्राप्त है। मंगल मकर राशि में उच्च व कर्क में नीच राशि के होते है। वर्तमान में मंगल कन्या राशि में विराजमान है और 27 अक्टूबर 2025 को अपनी स्वराशि वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे, ऐसे में रूचक नामक शक्तिशाली राजयोग का निर्माण होगा।वही दिवाली बाद नवंबर में धन, वैभव, ऐश्वर्य के दाता शुक्र मालव्य राजयोग बनाएंगे। वर्तमान में दैत्यों के गुरू शुक्र सिंह राशि में विराजमान है । 2 नवंबर को अपनी स्वामी राशि तुला में प्रवेश करेंगे और 25 नवंबर तक यहीं रहेंगे, ऐसे में तुला राशि में शुक्र मालव्य राजयोग बनेगा। अक्टूबर नवंबर में बनने वाले इन 2 राजयोग का 3 राशियों को विशेष लाभ मिलेगा । आईए जानते है कौन कौन सी है वो राशियां……..
डबल राजयोग का राशियों पर प्रभाव
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तुला राशि : मालव्य व रूचक राजयोग जातकों के लिए अनुकूल सिद्ध हो सकता है। विवाहितों का वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहेगा। अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते है। नौकरीपेशा को नए अवसर मिल सकते है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। मान- सम्मान की प्राप्ति होगी। पार्टनरशिप के काम में लाभ मिल सकता है।आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। समय- समय पर आकस्मिक धनलाभ हो सकता है। अविवाहित लोगों को विवाह का प्रस्ताव आ सकते है।
कुंभ राशि : मालव्य व रूचक राजयोग जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है। भाग्य का साथ मिलेगा।
मान – सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। ।देश- विदेश की यात्रा कर सकते हैं। धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। समाज में एक नई पहचान मिलेगी। व्यापारियों को अच्छा धनलाभ होगा। साथ ही कारोबार का विस्तार हो सकता है।
मकर राशि: मालव्य राजयोग जातकों के लिए शुभ फलदायी सिद्ध हो सकता है। कारोबार का विस्तार हो सकता है। आय में वृद्धि हो सकती है, नए नए स्त्रोत खुल सकते है। मीडिया, फैशन डिजाइनिंग, फिल्म लाइन और मॉडलिंग से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ मिल सकता है। लंबी दूरी की यात्रा कर सकते है। आर्थिक स्थिति अच्छी होगी । व्यापारियों को नए ऑर्डर मिल सकते हैं। बेरोजगार लोगों को नौकरी मिल सकती है। वहीं नौकरीपेशा को पदोन्नति मिल सकती है। परिवार का पूरा साथ मिलेगा। संपत्ति तथा वाहन खरीदने की योजना बना सकते हैं। वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। निवेश से लाभ होगा।
कुंडली में कब बनता है मालव्य/रूचक राजयोग
- वैदिक ज्योतिष के अनुसार, रूचक पंच महापुरुष योग मंगल ग्रह द्वारा बनता है। जब जन्मकुंडली के केंद्र स्थान में मंगल अपनी उच्च राशि मकर अथवा अपनी मूल त्रिकोण राशि मेष या फिर अपनी स्वराशि वृश्चिक में विराजमान होते है, तो रुचक राजयोग का निर्माण होता है। इस राजयोग से साहस, दौलत-शौहरत में वृद्धि होती है, व्यक्ति बलशाली बनता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में यह राजयोग होता है, वह व्यक्ति राजाओं जैसी जिंदगी जीता है, उसको सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
- मालव्य राजयोग शुक्र से संबंधित है, जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित है अर्थात शुक्र यदि कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में वृष, तुला अथवा मीन राशि में स्थित है तो कुंडली में मालव्य राजयोग बनता है। अगर शुक्र ग्रह पर सूर्य या गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो इस राजयोग का फल व्यक्ति को कम प्रदान होगा। क्योंकि सूर्य और गुरु का शुक्र के साथ शत्रुता का भाव है।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है।इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)