भोपाल।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में विधायक लक्ष्मण सिंह जबलपुर में गुरुवार को एक बार फिर दिल का दर्द बयां कर बैठे ।दरअसल पत्रकारों ने उनसे पूछा था अब तक उन्हें सरकार में कोई महत्वपूर्ण पद क्यों नहीं मिला ।इस पर लक्ष्मण सिंह बोले कि “मैं और कांतिलाल भूरिया जैसे वरिष्ठ शायद इस योग्य नहीं है कि उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी सौंपी जाए ।”पांच बार सांसद और चार बार विधायक रह चुके लक्ष्मण सिंह पहले भी कई बार अपनी ही सरकार के फैसलों और निर्णयों पर निशाना साध चुके हैं। दरअसल अपनी वरिष्ठता के बाद भी लक्ष्मण सिंह को न तो सरकार में कोई जगह मिली और ना ही संगठन में। उप चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल पर लक्ष्मण सिंह ने कहा कि जो कार्यकर्ताओं को संगठित करने की क्षमता रखें, उन्हें संगठन की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। कांग्रेस पार्टी को अपने संगठन को मजबूत करना चाहिए क्योंकि संगठन ही चुनाव जिताता है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में लक्ष्मण सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का पद गौरवशाली होता है और उनकी नीतियों की आलोचना तो की जा सकती है लेकिन उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाना ठीक नहीं।
फिर सामने आया लक्ष्मण का दर्द
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






