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बड़वानी में जल संकट की दर्दनाक तस्वीर, रात 3 बजे पानी के लिए भटक रहे बच्चे

Written by:Bhawna Choubey
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भीषण गर्मी के बीच बड़वानी के कोट बामनी गांव में पानी का संकट गहरा गया है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रात के अंधेरे में कई किलोमीटर दूर जाकर पानी ला रहे हैं, जबकि गांव के हैंडपंप सालों से बंद पड़े हैं।
बड़वानी में जल संकट की दर्दनाक तस्वीर, रात 3 बजे पानी के लिए भटक रहे बच्चे

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक तरफ प्रदेश भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ गांवों में पानी की भारी किल्लत लोगों की जिंदगी मुश्किल बना रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि छोटे-छोटे बच्चे भी रात के अंधेरे में पानी लाने के लिए घर से निकलने को मजबूर हैं।

यह मामला बड़वानी जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सेमलेट के कोट बामनी गांव का है। यहां करीब 840 की आबादी में से 500 से ज्यादा लोग गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। गांव में पानी की ऐसी कमी है कि लोगों को रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी भरना पड़ता है।

रात 3 बजे पानी की तलाश में निकल रहे बच्चे और महिलाएं

कोट बामनी गांव में सुबह की शुरुआत सूरज निकलने से पहले ही हो जाती है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग हाथ में खाली बर्तन और टॉर्च लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं। गांव से तीन से चार किलोमीटर दूर जाकर लोग कुओं और छोटे जल स्रोतों से पानी भरकर वापस लाते हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ रही है। कई बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी भरने में अपने परिवार की मदद करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि अगर सुबह जल्दी पानी नहीं लाया जाए तो बाद में पानी मिलना और मुश्किल हो जाता है। भीषण गर्मी में यह संघर्ष हर दिन बढ़ता जा रहा है।

बंद पड़े हैंडपंप और गंदा पानी पीने की मजबूरी

ग्रामीणों के मुताबिक गांव में मौजूद दो हैंडपंप कई सालों से खराब पड़े हुए हैं। इसके अलावा गांव के दो प्राकृतिक कुएं भी अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। कुओं का पानी गंदा हो चुका है और उनमें काई जम गई है, लेकिन मजबूरी में लोग वही पानी पीने को मजबूर हैं।

गांव की तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि लोग किस तरह दूषित पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण नहाने और दूसरे घरेलू कामों में भी दिक्कत हो रही है। इसके बावजूद लोग किसी तरह अपना जीवन चला रहे हैं।

कई बार शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पानी की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायत दी। आवेदन दिए गए, जनसुनवाई में बात रखी गई और संबंधित विभागों को भी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

लोगों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन गांव में पानी की स्थिति जस की तस बनी हुई है। गर्मी बढ़ने के साथ परेशानी भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते ध्यान दिया होता तो आज गांव के लोगों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

पानी की कमी का असर अब बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। कई बच्चे सुबह पानी भरने जाते हैं, जिसके कारण वे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते। वहीं गंदा पानी पीने से बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। तेज धूप और लंबी दूरी तय करने के कारण बच्चे और बुजुर्ग जल्दी थक जाते हैं। कई बार महिलाओं को घंटों लाइन में लगकर पानी भरना पड़ता है। गांव में पानी का संकट अब लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है।

प्रशासन से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीण

कोट बामनी गांव के लोग अब प्रशासन से जल्द राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि गांव के खराब हैंडपंप तुरंत सुधारे जाएं और स्थायी पेयजल व्यवस्था की जाए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पानी की समस्या दूर नहीं हुई तो आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने गांव में टैंकर से पानी सप्लाई बढ़ाने और नए जल स्रोत तैयार करने की मांग भी की है। गांव वालों का कहना है कि नर्मदा किनारे बसे इलाके में अगर लोग पानी के लिए भटक रहे हैं, तो यह चिंता की बड़ी बात है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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