मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार शाम (17 मार्च 2026) मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अहम मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न हुई । इस बैठक में प्रदेश के विकास से लेकर आमजन के हित में बड़े फैसले लिए गए। बैठक में एमएसपी पर गेहूं खरीद पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने और पशुपालन विभाग का नाम गौपालन एवं पशुपालन किए जाने की मंजूरी दी गई। वही अन्य प्रस्तावों को भी हरी झंड़ी मिली।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना में सरसों को शामिल करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अबतक 7 लाख से अधिक सोयाबीन उत्पादक किसानों को सरकार 1500 करोड. रुपए की राशि भावांतर योजना में दे चुकी है। अब सरसों उत्पादक किसानों को भी योजना का लाभ मिलेगा। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने किसानों के हित में भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजना लागू की है।

यहां विस्तार से पढ़िए मोहन कैबिनेट बैठक के बड़े फैसले

लोक निर्माण विभाग अंतर्गत विकास कार्यों के लिए 4,525 करोड़ स्वीकृत

मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों और अनुरक्षण के लिए 4 हजार 525 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

  • स्वीकृति अनुसार उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी (इंद्रा नगर) चौराहा से इंदौर गेट तक 4-लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर एवं निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2 लेन ऐलिवेटेड कॉरिडोर लंबाई 5.32km के निर्माण कार्य को विभागीय सूचकांक से मुक्त रखते हुए लागल राशि 945 करोड़ 20 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
  • मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 और जन भागीदारी अंतर्गत विकास के लिए अनुदान योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 7 करोड़ 38 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
  • एनडीबी से वित्त पोषण पुल और सड़क निर्माण की योजना की निरंतरता के लिए 50 करोड़ 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
  • मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-6 की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1543 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
  • मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम-7 की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 1,476 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
  • शासकीय आवास गृह, विश्राम गृहों के रखरखाव और अनुरक्षण के लिये 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए के लिए 200 करोड़ 35 रुपये की स्वीकृति दी गई है।
  • कार्यालय भवनों के रखरखाव, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनुरक्षण कार्य एवं शौर्य स्मारक के संचालन और संधारण हेतु 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए के लिए 300 करोड़ 70 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

एमएसपी पर गेहूं खरीद पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस

  • मंत्रिपरिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं पर 40 रुपये प्रति क्विंटल के मान से बोनस दिए जाने का निर्णय लिया है।
  • निर्णय अनुसार उपार्जित गेहूं में से भारत सरकार द्वारा स्वीकार न की जाने वाली सरप्लस मात्रा का निस्तारण मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन द्वारा खुली निविदा के माध्यम से किया जाएगा। इस पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।
  • किसानों को बोनस राशि का भुगतान विभागीय मद में बजट प्रावधान कराकर तथा सरप्लस मात्रा के निस्तारण व्यय की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजनांतर्गत आवंटित बजट से किया जाएगा।

रीवा: पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना से 37 ग्रामों को सिंचाई का लाभ

  • मंत्रि-परिषद द्वारा रीवा की पनवार माईक्रो सिंचाई परियोजना लागत राशि 228 करोड़ 42 लाख रुपयें, सैंच्य क्षेत्र 7350 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है।
  • परियोजना से रीवा जिले की जवा एवं त्योंथर तहसील के 37 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।

मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन की स्वीकृति

  • मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन कर मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम को वित्त विभाग के अंतर्गत किए जाने का अनुमोदन दिया गया है।
  • “मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम” को एमएसएमई से वित्त विभाग को आवंटित किये जाने से राज्य पर कोई वित्तीय भार नहीं आयेगा।

पशुपालन विभाग कहलाएगा गौपालन एवं पशुपालन विभाग

  • मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कार्य (आवंटन) नियमों की अनुसूची में संशोधन की स्वीकृति दी है।
  • स्वीकृति अनुसार पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम संशोधित कर गौपालन एवं पशुपालन विभाग और संचालनालय, पशुपालन एवं डेयरी का नाम परिवर्तित कर संचालनालय,गौपालन एवं पशुपालन किये जाने का अनुमोदन किया गया है।

19 मार्च से शुरु होगा जल गंगा संवर्धन अभियान

  • मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में आगामी 19 मार्च से राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ हो रहा है। प्रदेश के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान का यह तीसरा वर्ष है। कुओं, बावड़ियों, नदियों के पुनरुद्धार के अभियान से सभी वर्गों को जोड़ने के लिए नगरीय निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय निकाय को निर्देश दिए।
  • बता दें कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है। गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए।
  • भू-जल संवर्धन के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य भी प्रारंभ किया गया। नदियों की निर्मलता के लिए प्रदेश की 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण जल स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई। लगभग 145 नदियों के उद्गम क्षेत्र में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजना भी प्रारंभ की गई है।

केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय से मप्र का करारनामा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय के साथ नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण करारनामा हुआ है, जिसके अंतर्गत पेयजल योजना के लिए पाइप लाइन बिछाने और हर व्यक्ति तक जल पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान 2 राज्यों का चयन हुआ है। स्वच्छ जल प्रदाय के लिए वर्ष 2028 तक जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने और जल जीवन मिशन 2.0 पुनर्गठित कर लागू करने की स्वीकृति दी गई है,जिसका लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा।