मध्यप्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का व्यापक प्रचार करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में छात्र-छात्राओं को अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि सागर जिले में पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण छात्राओं को नदी पार कर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण अधोसंरचना की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है। उन्होंने पूछा कि छात्रों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर भाजपा सरकार इतनी उदासीन क्यों है।
छात्रों की सुरक्षा खतरे में
हाल ही में विदिशा जिले के एक गांव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचने के लिए बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के कंक्रीट पिलरों पर छलांग लगाते हुए नजर आए। बारिश के मौसम में पानी के बीच इस तरह आवागमन करना बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षित पुल या सुगम रास्ता नहीं होने के कारण बच्चों को रोज इसी रास्ते से स्कूल जाना पड़ता है।
इसी बीच अब सागर जिले से भी ऐसी ही चिंताजनक तस्वीरें सामने आई हैं। यहां पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण छात्राओं को नदी पार कर स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से यह सफर और अधिक खतरनाक हो जाता है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सुरक्षित पुल या वैकल्पिक मार्ग की मांग की जा रही है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इन घटनाओं का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा है कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार में बेटियां जान जोखिम में डालकर पढ़ने जा रही हैं।” उन्होंने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर यही है कि कहीं बच्चे स्टॉप डैम पर छलांग लगाकर स्कूल पहुंच रहे हैं तो कहीं छात्राओं को नदी पार करनी पड़ रही है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार विकास और शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल तक पहुंचने की सुविधा मिले। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार को बेटियों और छात्रों की सुरक्षा एवं शिक्षा के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।






