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4100 मेगावॉट के नए थर्मल पॉवर प्लांट हेतु कोयले के आवंटन को मिली स्वीकृति, सीएम डॉ मोहन यादव ने PM Modi को दिया धन्यवाद

Written by:Atul Saxena
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मध्य प्रदेश के लिये 2024-35 के लिये तैयार की गयी संसाधन उपयुक्तता योजना के अनुसार वर्ष 2032 तक राज्य को 4100 मेगावॉट अतिरिक्त कोल-आधारित विद्युत क्षमता की आवश्यकता होगी।
4100 मेगावॉट के नए थर्मल पॉवर प्लांट हेतु कोयले के आवंटन को मिली स्वीकृति, सीएम डॉ मोहन यादव ने PM Modi को दिया धन्यवाद

CM Dr. Mohan Yadav thanks PM Modi: मध्य प्रदेश के लिए ये अच्छी खबर है केंद्र की मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश द्वारा 4100 मेगावॉट वाले नए थर्मल पॉवर प्लांट के लिए कोयले के आवंटन को स्वीकृति देने के अनुरोध किया था, मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इन दिनों विदेश यात्रा पर है, वे इंग्लैड टूर पूरा कर अब जर्मनी टूर पर हैं जहाँ वे 30 नवम्बर तक रहेंगे, कोयला आवंटन को मंजूरी मिलने पर उन्होंने ख़ुशी जताई है और रोजगार की द्रष्टि से इसे संजीवनी बताया है
सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा, मध्य प्रदेश की कोल आधारित विद्युत क्षमता की आवश्यकता के आधार पर भारत सरकार की स्टेंडिंग लिंकेज समिति (लांग टर्म) ने प्रदेश के लिये 4100 मेगावॉट के नए थर्मल पॉवर प्लांट हेतु कोयले के आवंटन को स्वीकृति प्रदान की है।

CM मोहन यादव ने PM Modi का माना आभार  

उन्होंने कहा- मध्य प्रदेश की ऊर्जा सम्बन्धी जरूरतों को पूर्ण करने वाले इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मैं आभार व्यक्त करता हूँ। निश्चित ही नए पावर प्लांट की स्थापना से प्रदेश में 25,000 करोड़ रुपये का सीधा निवेश एवं हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी तथा भविष्य में सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी मध्य प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा।

राज्य को दीर्घकालिक ऊर्जा की आवश्यकता

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कोयला भण्डार की खपत वर्ष 2029-30 तक अनुमानित है। विद्युत मंत्रालय द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार राज्य को दीर्घकालिक ऊर्जा की आवश्यकता है। विद्युत मंत्रालय ने जुलाई-2024 को मध्य प्रदेश को शक्ति नीति के तहत दीर्घकालिक कोयला लिंकेज प्रदान करने की सिफारिश की थी, जिससे 4 हजार 100 मेगावॉट की कोल-आधारित पॉवर क्षमता के लिये कोयला का आवंटन किया जा सके और देश में कोयला आधारित क्षमता के लिये आवश्यक विस्तार को पूरा किया जा सके।

ये है विद्युत मंत्रालय का उद्देश्य 

बिजली की खपत में हो रही वृद्धि के कारण विद्युत मंत्रालय का उद्देश्य वर्ष 2032 तक 80 गीगावॉट अतिरिक्त कोल आधारित क्षमता जोड़ना है। लगभग 26 गीगावॉट के कोल-आधारित प्लांट्स पहले से निर्माणाधीन है, जिसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। कोयला मंत्रालय ने राज्य को स्वयं के संसाधनों से या फिर ट्रैफिक पॉलिसी-2016 के तहत बिजली खरीद के लिये निविदा जारी कर इस अंतर को पूरा करने के लिये योजना बनाने या फिर शक्ति नीति के तहत योजना बनाने के लिये कहा।

2024-35 के लिये तैयार की गयी संसाधन उपयुक्तता योजना

मध्य प्रदेश के लिये 2024-35 के लिये तैयार की गयी संसाधन उपयुक्तता योजना के अनुसार वर्ष 2032 तक राज्य को 4100 मेगावॉट अतिरिक्त कोल-आधारित विद्युत क्षमता की आवश्यकता होगी। विद्युत मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य के लिये 4100 मेगावॉट के अतिरिक्त कोल-आधारित क्षमता की आवश्यकता पहले से ही शक्ति नीति के तहत निर्धारित 1230 मेगावॉट (नेट) से अतिरिक्त होगी।

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