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भोपाल में 9.5 लाख बच्चों को आज खिलाई जाएगी एलबेंडाजोल, 1 से 19 साल तक के बच्चे अभियान में शामिल, नोडल टीचर की मौजूदगी में दी जाएगी दवा

भोपाल में आज 6 अक्टूबर को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत करीब 9.5 लाख बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। दरअसल 1 से 19 साल तक के बच्चों को सरकारी और निजी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, मदरसों और छात्रावासों में यह दवा दी जाएगी।
भोपाल में 9.5 लाख बच्चों को आज खिलाई जाएगी एलबेंडाजोल, 1 से 19 साल तक के बच्चे अभियान में शामिल, नोडल टीचर की मौजूदगी में दी जाएगी दवा

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के मौके पर भोपाल में आज मंगलवार को बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत करीब साढ़े 9 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा एलबेंडाजोल खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें 1 से 19 साल तक के बच्चों को उनकी पढ़ाई और रहने की जगह के हिसाब से स्कूल, आंगनवाड़ी, मदरसे और हॉस्टल में दवा दी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही एलबेंडाजोल की गोलियां उपलब्ध करा दी हैं।

दरअसल इस अभियान में केवल बच्चों को ही शामिल नहीं किया गया है। 20 से 49 साल की ऐसी महिलाओं को भी एलबेंडाजोल दी जाएगी जो गर्भवती या धात्री नहीं हैं। स्कूलों में दवा देने के लिए नोडल टीचर्स को जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षकों को दवा खिलाने की प्रक्रिया के साथ इसके फायदे की जानकारी भी दी गई है। हालांकि बच्चों को नोडल टीचर की मौजूदगी में ही गोली खिलाई जाएगी।

स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में ऐसे दी जाएगी दवा

वहीं भोपाल में अभियान को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से तैयारी की है। सरकारी और निजी स्कूलों के अलावा आंगनवाड़ी केंद्र, मदरसे और छात्रावास भी अभियान का हिस्सा हैं। इस व्यवस्था का मकसद 1 से 19 साल की उम्र के ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक कृमिनाशक दवा पहुंचाना है। स्कूलों में नोडल टीचर्स की मौजूदगी में बच्चों को एलबेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को दवा देने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवा के इस्तेमाल और उसके फायदे को लेकर भी नोडल टीचर्स को बताया गया है। वहीं आंगनवाड़ी केंद्रों पर भी अभियान के तहत बच्चों तक दवा पहुंचाई जाएगी।

बच्चों को संबंधित संस्थान में ही कृमिनाशक गोली दी जा सकेगी

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अभियान में अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है। स्वास्थ्य विभाग के साथ स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। इन विभागों के बीच तालमेल के जरिए बच्चों और अभियान में शामिल पात्र महिलाओं को दवा खिलाई जाएगी।भोपाल में एक ही दिन बड़ी संख्या में बच्चों तक पहुंचने वाले इस अभियान के लिए स्कूल और आंगनवाड़ी स्तर पर दवा उपलब्ध कराई गई है। इससे अभियान के दौरान बच्चों को संबंधित संस्थान में ही कृमिनाशक गोली दी जा सकेगी।

कृमि संक्रमण का बच्चों के विकास पर पड़ सकता है असर

दरअसल स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पेट में होने वाला कृमि संक्रमण बच्चों के स्वास्थ्य के साथ उनकी पढ़ाई को भी प्रभावित कर सकता है। संक्रमण की वजह से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ने की बात विभाग ने बताई है। इसका असर स्कूल में उनकी उपस्थिति और पढ़ाई पर भी दिखाई दे सकता है। कृमि संक्रमण के कारण एनीमिया की स्थिति बनने पर बच्चों की शारीरिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसके साथ बौद्धिक और शैक्षणिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत बच्चों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा देने का अभियान चलाया जाता है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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