भोपाल: मध्यप्रदेश में इन दिनों जेन अल्फा के विरोध-प्रदर्शनों का दौर देखने को मिल रहा है। कॉलेज छात्रों के बाद अब स्कूली छात्र भी अपनी मांगों और स्कूलों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे विरोध-प्रदर्शन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी बीच, रविवार को राजधानी भोपाल में एक बार फिर स्कूली छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
बता दें कि एक तरफ जहां भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक भर्ती के उम्मीदवारों का प्रदर्शन चल रहा है तो वहीं अब सरकारी स्कूलों के मर्जर के खिलाफ जेन अल्फा ने भी अपना मोर्चा खोल दिया है। कह सकते हैं कि भोपाल का नीलम पार्क इन दिनों विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है।
स्कूल मर्जर के खिलाफ नीलम पार्क पहुंचे स्कूली बच्चे
बता दें कि नीलम पार्क में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से स्कूली बच्चे (Gen Alpha) स्कूल मर्जर के फैसले के खिलाफ धरना देने पहुंचे। बच्चों के हाथों में अलग अलग नारों से लिखी तख्तियां भी थी। बच्चों का कहना है कि गांवों के स्कूलों को सांदीपनि स्कूलों में मर्ज किए जाने के बाद उन्हें 10 से 15 किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए जाना पड़ रहा है। सरकार की ओर से बस सुविधा उपलब्ध कराए जाने के बावजूद इसमें भी कई तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्कूल मर्जर का फैसला वापस लेने के साथ ही शिक्षा विभाग में खाली पदों पर भर्ती करने और TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग भी उठाई।

पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सरकार पर बोला हमला
बता दें कि स्कूली छात्रों के इस प्रदर्शन को कांग्रेस CWC मेंबर और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने अपना समर्थन दिया और राज्य की भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कह कि कांग्रेस ने देशभर में मॉडल स्कूलों की मजबूत व्यवस्था खड़ी की, जहां से पढ़कर हजारों छात्र आगे बढ़े और भाजपा के कई नेता भी इसी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि आज वही भाजपा सरकार नाम बदलने की राजनीति के जरिए उसके द्वारा खड़ी की गई शिक्षा व्यवस्था और मॉडल स्कूलों के ढांचे को कमजोर कर रही है।
कांग्रेस ने कहा कि केवल इमारतों और विज्ञापनों से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरती, बल्कि इसके लिए अच्छी फैकल्टी, बेहतर परिवहन और मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था जरूरी है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने शिक्षा में सुधार से ज्यादा उसके प्रचार और दिखावे पर जोर दिया है।
गौरतलब है कि हाल ही में डीएमएस रीजनल स्कूल के छात्र-छात्राएं स्कूल के मर्जर के विरोध में सड़क पर उतरे थे। इस मामले में छात्रों ने रीजनल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसके गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया था। छात्रों की मुख्य मांग थी कि रीजनल स्कूल का केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में मर्जर नहीं किया जाए। उनका कहना था कि स्कूल की अलग शैक्षणिक पहचान और प्रयोगात्मक स्वरूप को बरकरार रखा जाना चाहिए।





