भोपाल लोकायुक्त की जांच रिपोर्टों पर विशेष अदालत द्वारा दिए गए बड़े फैसले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर कमलनाथ ने सरकार और जांच एजेंसी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बता दें कि भोपाल कोर्ट ने लोकायुक्त द्वारा इस साल जनवरी से अब तक पेश की गई 35 खात्मा रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है और सभी मामलों में दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।
इसे लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि भोपाल से सामने आए छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मामलों में लोकायुक्त द्वारा इस साल दाखिल की गई पैंतीस खात्मा रिपोर्टों को कोर्ट ने खारिज करना इस बात का संकेत है कि जांच प्रक्रिया गंभीरता से नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मामलों में गरीब और जरूरतमंद छात्रों के हक का पैसा शामिल है, वहां भी जांच में लापरवाही बरती गई।
क्या है मामला
भोपाल की विशेष अदालत ने लोकायुक्त संगठन की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसके द्वारा इस वर्ष जनवरी से अब तक पेश की गई कुल 35 खात्मा रिपोर्टों को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कई मामलों में जांच अधूरी रही और आवश्यक साक्ष्य, दस्तावेज तथा गवाहों के बयान पर्याप्त रूप से एकत्र नहीं किए गए। अब अदालत के आदेश के बाद सभी मामलों में दुबारा जांच होगी।
लोकायुक्त द्वारा जो प्रकरण रद्द किए गए उनमें से 34 मामले छात्रवृत्ति से जुड़े कथित गड़बड़ी के हैं, जिनमें पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग से संबंधित शिकायतें शामिल हैं। आरोप है कि छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताओं की शिकायतों के बावजूद जांच प्रक्रिया में जरूरी रिकॉर्ड जैसे कि उपस्थिति रजिस्टर, नामांकन सूची और परीक्षा रिकॉर्ड को ठीक से शामिल नहीं किया गया। अदालत ने टिप्पणी की है कि रिकॉर्ड के अभाव में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि छात्र वास्तव में संबंधित संस्थानों में पढ़ रहे थे या नहीं, जिससे जांच की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
कमलनाथ ने जांच प्रणाली पर उठाए सवाल
इस मामले को लेकर कमलनाथ ने राज्य सरकार और जांच प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने साफ तौर पर यह माना है कि कई मामलों में न तो पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए और न ही जांच पूरी तरह से की गई। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दर्जनों मामलों में एक साथ इतनी कमजोर जांच आखिर कैसे हुई। पूर्व सीएम ने कहा कि यह मामला सिर्फ तकनीकी खामी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति जैसे संवेदनशील मामलों में अगर जांच एजेंसी ही ढिलाई बरते तो यह सीधे तौर पर जरूरतमंद छात्रों के अधिकारों पर चोट है।
सरकार को घेरा
कमलनाथ ने बीजेपी सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का दावा करती रही है, लेकिन इस घटना ने उन दावों की सच्चाई उजागर कर दी है। जब लोकायुक्त जैसी महत्वपूर्ण संस्था की जांच पर खुद कोर्ट सवाल उठाए, तो यह सिर्फ एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरी सरकार की जवाबदेही का मामला बन जाता है। उन्होंने पूछा कि “क्या सरकार इस मामले में जिम्मेदारी तय करेगी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी, या फिर इसे भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा”।
कांग्रेस नेता ने कहा है कि अगर सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ है तो उसे इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए, ये भी सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो जनता के बीच यही संदेश जाएगा कि बीजेपी सरकार में भ्रष्टाचार पर सिर्फ बयानबाजी होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचारियों को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है।






