भोपाल। प्रदेश में मंत्रीमंडल के विस्तार को लेकर काफी समय से अटकलें चल रही हैं, जिस पर अब जल्द ही विराम लग सकता है। मंत्रीमंडल में किसको स्थान देना है और किसको बाहर का रास्ता दिखाना है इसको लेकर सहमति बन चुकी है, वहीं मंत्री बनने वालों के नाम भी तय कर लिए गए हैं। सरकार को किसी तरह का खतरा न रहे इसको देखते हुए मंत्रीमंडल विस्ताव में सपा एवं बसपा के एक-एक विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। अंचल से केपी सिंह (कक्काजू) का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। इसको लेकर सिंधिया ने भी अपनी सहमति दे दी है।
विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने मंत्रीमंडल का विस्तार करना चाहते हैं और इसी को लेकर वह दिल्ली में भी हाईकमान से बात कर चुके हैं। सरकार को लेकर आए दिन भाजपा नेताओं द्वारा दिए जाने वाले बयानों के कारण अधिकारी भी असमंजस में हैं, यही कारण है कि कमलनाथ इस असमंजस की स्थिति को समाप्त करना चाहते हैं। वैसे आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस के पास संख्या बल पर्याप्त है, लेकिन तोडफ़ोड़ की आशंका जिस तरह से जताई जा रही है और भाजपा के नेता जो बयान दे रहे हैं उसको लेकर कांग्रेस फूंक- फूंक कर कदम रख रही है। कांग्रेस के अंदरखाने की मानें तो अंचल से केपी सिंह का मंत्री बनना तय माना जा रहा है, इसको लेकर सिंधिया भी उनके नाम पर सहमत हैं। इसके पीछे कारण यह है कि लोकसभा चुनाव में गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से सिंधिया सिर्फ पिछोर विधानसभा से जीते थे और इसका इनाम वह अब केपी सिंह को देना चाहते हैं। वहीं कुछ मंत्रियों के हटाए जाने की भी चर्चा चल रही है, अब इसमें कितनी सत्यता है यह तो मंत्रीमंडल विस्तार के समय ही पता चलेगा, लेकिन गुना जिले से एक मंत्री को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की संभावना अधिक बताई जा रही है। बसपा के खाते से अगर मंत्री बनता है तो भिंड के संजीव सिंह की लॉटरी लग सकती है।
हो सकता है विभागों में बदलाव
कांग्रेस सूत्र का कहना है कि सरकार के छह माह के कार्यकाल के दौरान कुछ मंत्रियों की शिकायतें मुख्यमंत्री के पास पहुंची है। इन शिकायतों से मुख्यमंत्री ने समर्थक नेताओं को अवगत करा दिया है और उनकी सहमति ली जा रही है कि किन मंत्रियों के विभाग बदले जाएं। सरकार के मंत्री जिस गति से काम करते हैं उस गति को फिलहाल कांग्रेस के मंत्री नहीं पकड़ सके हंै, यही कारण है कि कांग्रेस कार्यकर्ता भी अब अपने मंत्रियों से नाराज होने लगे हैं। सिंधिया के पास तो ऐसी शिकायतें पहुंच चुकी हैं जिसको लेकर उन्होंने अपने समर्थक मंत्रियों को दिल्ली बुलाकर साफ शब्दों में बोल दिया है कि कार्यकर्ताओं के काम को प्रमुखता देना शुरू कर दो, क्योंकि कार्यकर्ताओं की दम पर ही आप मंत्री बने हो। यही कारण है कि कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव भी हो सकता है।





