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कांग्रेस ने लगाए भोपाल मेमोरियल अस्पताल में अनियमितताओं के आरोप, अमित शर्मा ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

कांग्रेस नेता ने भर्ती में कथित गड़बड़ियों, कर्मचारियों के बकाया भुगतान और महंगी जांच मशीनों के इस्तेमाल की पड़ताल कराने की मांग की है। उन्होंने मरीजों को निजी केंद्रों पर भेजने और गैस पीड़ितों को इलाज में प्राथमिकता नहीं मिलने की शिकायतों की जांच कराकर जवाबदेही तय करने की बात भी कही है।
Amit Sharma

Amit Sharma

मध्यप्रदेश कांग्रेस के महासचिव अमित शर्मा ने भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए अस्पताल में मरीजों के उपचार, आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, कर्मचारियों के भुगतान और महंगी चिकित्सा मशीनों के उपयोग में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया से लेकर मरीजों को बाहर जांच और उपचार के लिए भेजने तक कई गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। इन मामलों में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पत्रकार वार्ता में मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, पूर्व प्रवक्ता अभिनव बरोलिया और राहुल राज भी उपस्थित रहे।

डॉक्टर पर लगाए आरोप

अमित शर्मा ने शिकायतों का हवाला देते हुए डॉ. अमन चतुर्वेदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि चिकित्सक के खिलाफ शिकायतों के बाद उन्हें अस्पताल से हटाया गया। उन पर शराब और नशीले पदार्थों के सेवन की स्थिति में मरीजों का ऑपरेशन करने के आरोप भी लगाए गए हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों की स्वतंत्र मेडिकल और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।

भर्ती के नाम पर रकम लेने का आरोप

अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई। शिकायत में एजेंसी से जुड़े सुपरवाइजर बसंत अवस्थी और सैयद असरफ अली की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर 50 हजार से दो लाख रुपये तक की रकम ली जाती है। कांग्रेस ने भर्ती रिकॉर्ड और एजेंसी के अनुबंधों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

पुराने कर्मचारियों को हटाने और भुगतान रोकने का मामला

शिकायत के अनुसार, कई आउटसोर्स कर्मचारियों से छह से आठ महीने या लगभग एक वर्ष तक काम कराने के बाद उन्हें स्थानांतरित कर दिया जाता है या सेवा से हटा दिया जाता है। वहीं, अस्पताल में 18 से 20 वर्षों तक काम कर चुके कर्मचारियों को हटाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। कर्मचारियों के टीए-डीए, बोनस, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभों के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने संबंधित एजेंसियों और अस्पताल प्रशासन के भुगतान रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि कर्मचारियों के बकाया और वैधानिक अधिकारों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों के उपयोग पर सवाल

अस्पताल में करोड़ों रुपये की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों का पर्याप्त उपयोग नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मशीनों के उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को जांच के लिए बाहर भेजा जाता है। मरीजों को निजी केंद्रों पर रेफर करने के पीछे कथित कमीशनखोरी की आशंका भी जताई गई है। कांग्रेस ने मशीनों के उपयोग, मरीजों को रेफर करने के रिकॉर्ड और संबंधित जांच केंद्रों के साथ भुगतान व्यवस्था की जांच की मांग की है।

अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

शिकायत में अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें मैडम श्रीवास्तव और देवेंद्र सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की कमी है। कांग्रेस ने प्रशासनिक निर्णयों, मरीजों को उपचार में प्राथमिकता देने की प्रक्रिया और शिकायतों के निपटारे की जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

गैस पीड़ितों को प्राथमिकता नहीं मिलने का आरोप

भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित लोगों के उपचार के लिए स्थापित अस्पताल में गैस पीड़ितों को इलाज के लिए परेशान होने और पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलने की शिकायत भी उठाई गई। आरोप है कि आयुष्मान कार्डधारी मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि गैस पीड़ितों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है। कांग्रेस ने इस व्यवस्था की जांच कर गैस पीड़ितों को मिलने वाली सुविधाओं और उपचार प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

दस्तावेजों की जांच कर कार्रवाई की मांग

अमित शर्मा ने मांग की कि बीएमएचआरसी की भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्स एजेंसियों के अनुबंध, कर्मचारियों के भुगतान, चिकित्सा मशीनों के उपयोग, मरीजों के रेफरल, आयुष्मान कार्डधारी मरीजों की भर्ती और गैस पीड़ितों के उपचार की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच में भर्ती रिकॉर्ड, भुगतान विवरण, मशीनों के उपयोग से संबंधित दस्तावेज और मरीजों की शिकायतों को शामिल किया जाना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि जांच में भ्रष्टाचार, लापरवाही या आर्थिक अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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