मध्यप्रदेश में पुराने बारदाने की खरीद को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि राज्य में बारदाना खरीद प्रक्रिया के दौरान लगभग 80 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की कोशिश की गई, जिसे बाद में मुख्य सचिव के हस्तक्षेप से रोका गया।
उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सरकार के भीतर मौजूद भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण है। कांग्रेस नेता ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता अजय विश्नोई द्वारा इस बारे में लगाए गए आरोपों के हवाले से कहा कि जब सत्तारूढ़ दल के ही एक विधायक इस तरह की गड़बड़ी की बात स्वीकार कर रहे हैं तो यह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बारदाना खरीद प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप
उमंग सिंघार ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से आरोप लगाया है कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए बारदाना खरीद में कीमतें असामान्य रूप से बढ़ाई जा रही थीं, जिससे राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता था। उन्होंने कहा कि “खुद भाजपा विधायक मान रहे हैं कि बारदाना खरीद में 80 करोड़ की लूट हो रही थी, जिसे मुख्य सचिव को रोकना पड़ा।”
उमंग सिंघार ने सीएम से की जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा है कि यह पूरा मामला “बीजेपी के कुशासन और संगठित भ्रष्टाचार” की ओर इशारा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने, उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। बता दें कि वो लगातार गेहूं खरीदी प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने कहा है कि खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और कई स्तरों पर गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।
क्या है मामला
यह पूरा विवाद मध्यप्रदेश राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम में पुराने बारदाने की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गेहूं खरीदी के बाद उसके भंडारण के लिए पुराने बारदाने की खरीद का टेंडर जारी किया गया था, जिसमें शुरुआत में ही दरों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया। उनके अनुसार, टेंडर में कुछ फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए दरें बढ़ाकर 54.20 रुपये प्रति बोरा तक पहुंचा दी गई थीं, जबकि बाजार दर इससे काफी कम बताई जाती है। बीजेपी नेता ने कहा कि इस अनियमितता की जानकारी मिलने पर उन्होंने सीधे मुख्य सचिव अनुराग जैन से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद मुख्य सचिव ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उस टेंडर को निरस्त कराया और नई निविदा प्रक्रिया शुरू की गई।






