Hindi News

प्रीतम लोधी प्रकरण: जीतू पटवारी का पुलिस के नाम खुला पत्र, पूछा “देश के सबसे प्रशिक्षित, अनुशासित, साहसी अधिकारी रक्षात्मक मुद्रा में क्यों”

Written by:Shruty Kushwaha
Last Updated:
अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि बार-बार ऐसे प्रसंग सामने आते हैं जहां BJP नेता खुलेआम पुलिस अधिकारियों को डराने, दबाव बनाने या अपमानित करने का प्रयास करते हैं। उससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि इन घटनाओं के बाद पुलिस तंत्र की प्रतिक्रिया अक्सर बेहद सीमित, संयमित और कभी-कभी मौन ही रह जाती है। उन्होंने इस खामोशी पर सवाल उठाए हैं।
प्रीतम लोधी प्रकरण: जीतू पटवारी का पुलिस के नाम खुला पत्र, पूछा “देश के सबसे प्रशिक्षित, अनुशासित, साहसी अधिकारी रक्षात्मक मुद्रा में क्यों”

Jitu Patwari

मध्यप्रदेश में हाल ही में सामने आए एक विवाद ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा एक आईपीएस अधिकारी को धमकी देने की घटना के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश पुलिस और देशभर के पुलिसकर्मियों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है और कई सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के व्यवहार का नहीं, बल्कि उस माहौल का संकेत है जिसमें “सत्ता का अहंकार कानून और संविधान पर हावी होता जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा बार-बार पुलिस अधिकारियों को डराने और दबाव बनाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया अक्सर सीमित या मौन रहती है।

पुलिसकर्मियों के नाम जीतू पटवारी का खुला पत्र

जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश पुलिस और देशभर के पुलिसकर्मियों के नाम लिखे खुले पत्र में पुलिस तंत्र से सीधा सवाल करते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण “देश के सबसे प्रशिक्षित और साहसी अधिकारी रक्षात्मक मुद्रा में आ गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब आम नागरिकों के मामले होते हैं तब तो पुलिस का रवैया कठोर दिखता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों के सामने वही तंत्र कमजोर क्यों पड़ जाता है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सच नहीं है कि जब पुलिस निष्पक्ष और संविधान के दायरे में रहकर काम करती है, तब किसी भी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति की हिम्मत नहीं होती कि वह उसे आंख दिखा सके? लेकिन जब वही पुलिस बीजेपी सरकार के अनैतिक कार्यों की संरक्षक बनती हुई दिखाई देती है, तब उसे दबाव भी झेलना पड़ता है और अपमान भी सहना पड़ता है।

IPS एसोसिएशन पर भी टिप्पणी

पत्र में आईपीएस एसोसिएशन के रुख पर भी टिप्पणी करते हुए जीतू पटवारी ने कहा है कि उनके पत्र में “आक्रोश कम और विवशता ज्यादा” नजर आती है, जो एक दबावग्रस्त व्यवस्था की ओर संकेत करता है। उन्होंने लिखा कि “मैंने IPS एसोसिएशन का पत्र भी पढ़ा। उस पत्र में आक्रोश कम और विवशता ज्यादा नजर आती है। यह एक मजबूत और स्वाभिमानी संस्था की आवाज नहीं, बल्कि एक ऐसे तंत्र की अपील प्रतीत होती है जो भीतर से दबाव में है।”

लोकतंत्र के लिए खतरे की चेतावनी

कांग्रेस नेता ने इसे सिर्फ पुलिस का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का मुद्दा बताते हुए कहा कि अगर कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखेगी तो आम नागरिक का भरोसा भी डगमगा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पत्र पुलिसकर्मियों के खिलाफ नहीं है। देश के लाखों पुलिसकर्मी दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, और उनकी कर्मठता और साहस को पूरा देश सलाम करता है। यह पत्र उन परिस्थितियों के खिलाफ है, जो आपको आपकी मूल भूमिका से दूर कर रही हैं।

पुलिसकर्मियों से अपील

अपने पत्र में जीतू पटवारी ने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे अपने “साहस और कर्तव्य” को याद करें और संविधान को सर्वोपरि मानते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ही डर जाएगी या चुप हो जाएगी तो कानून का राज सिर्फ एक कल्पना बनकर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि “समय आ गया है कि आप अपनी आवाज खुद बनें। क्योंकि जब कानून की रक्षा करने वाले ही खामोश हो जाते हैं, तब अन्याय बोलने लगता है।”

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
Follow Us :GoogleNews