नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे को लेकर भाजपा सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत और 43 लोगों के घायल होने के बाद सरकार ने नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, लेकिन इनमें से तीन पुलिसकर्मियों की मंदिर में ड्यूटी ही नहीं थी।
कांग्रेस नेता ने पूछा कि जिन पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर ड्यूटी नहीं थी, उन्हें निलंबित करके सरकार किसकी जवाबदेही तय कर रही है। उन्होंने कहा है कि ये सिर्फ कार्रवाई के नाम पर दिखावा किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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उमंग सिंघार ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
उमंग सिंघार ने हादसे की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने सवाल किया कि जिस रास्ते पर बाइक तक नहीं जा सकती, वहां ट्रक कैसे पहुंच गया। मंदिर की सुरक्षा और निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और सिर्फ़ निलंबन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि जनता को हादसे के संबंध में जवाब मिलना चाहिए, पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
क्या है मामला
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में रविवार को नवरात्रि के दौरान हुए हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 43 लोग घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, धान से भरा पंजाब नंबर का एक ट्रक मंदिर की ओर जाने वाले ढलान वाले रास्ते पर पहुंच गया जहां भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था। ट्रक बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ा और अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के प्रवेश द्वार से टकरा गया। हादसे के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर ग्वालियर के सिटी एसपी को पद से हटाया गया और नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इस कार्रवाई में निलंबित पुलिसकर्मियों में से तीन की मंदिर में ड्यूटी नहीं होने की बात कही जा रही है। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में चूक और भारी वाहन प्रतिबंधित रास्ते पर कैसे पहुंचा इसकी जांच को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
