मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में पैक्ड घी के सैंपल फेल होने के मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में अब “मिलावट” के नए मायने सामने आ रहे हैं। उन्होंने इसे मिलावट, लापरवाही, व्यवस्था की विफलता और सरकारी टालमटोल से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की निगरानी पर भी सवाल उठाए हैं।
दरअसल, जुलाई से सितंबर के बीच इंदौर में पैक्ड घी के सैंपलों की जांच की गई थी। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 28 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 24 सैंपल अनसेफ और 4 सब-स्टैंडर्ड पाए गए। अनसेफ सैंपलों में से 16 की सीसा जांच कराई गई, जिनमें 10 सैंपलों में सीसे की मात्रा तय सीमा से अधिक मिली।
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जांच रिपोर्ट आने से पहले बाजार पहुंचा घी
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सीसे की मात्रा 0.1 से 0.21 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक मिली, जबकि इसकी स्वीकार्य सीमा 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है। यानी कुछ सैंपलों में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा से 5 से 10.5 गुना तक ज्यादा पाई गई। इन 24 अनसेफ सैंपलों से करीब 17 हजार लीटर घी का स्टॉक जुड़ा हुआ है।
विभागीय जानकारी के मुताबिक कार्रवाई से पहले इस स्टॉक का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा बाजार में पहुंच चुका था। अनुमान के मुताबिक यह मात्रा लगभग 2,550 से 3,400 लीटर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित कंपनियों को चिन्हित बैच का घी बाजार से वापस बुलाने के लिए पत्र भेजे हैं।
विभाग ने साफ किया है कि कार्रवाई पूरे ब्रांड के सभी उत्पादों के खिलाफ नहीं है। फिलहाल जांच में सामने आए उन्हीं सैंपलों और संबंधित बैच को लेकर कार्रवाई की जा रही है। भोपाल स्तर से गुजरात, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों के संबंधित अधिकारियों को भी पत्र भेजे गए हैं ताकि वहां भी संबंधित ब्रांड और बैच की जांच कराई जा सके।
कांग्रेस ने किए ‘मिलावट’ पर सवाल
इस मामले को लेकर जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को घेरा है। उन्होंने कहा कि इंदौर के प्रभारी मंत्री खुद मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उनके प्रभार वाले शहर में खाद्य पदार्थों में मिलावट और सीसा मिलने के मामले ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में अब “मिलावट” के नए मुहावरे सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ घी के सैंपल फेल होने तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल है कि असुरक्षित घी जांच रिपोर्ट आने से पहले बाजार तक कैसे पहुंच गया और उपभोक्ताओं तक पहुंच चुके स्टॉक को लेकर क्या कार्रवाई की गई है।