प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए बीएलओ की भूमिका को अत्यधिक दबावपूर्ण बना दिया है, जिससे मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया के दौरान उनके लिए तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में पारदर्शिता आवश्यक है और एसआईआर के दौरान डबल नाम या गलत प्रविष्टियों को हटाना तकनीकी प्रक्रिया है, लेकिन सरकार इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
पटवारी ने कहा कि केंद्र सरकार और केंद्रीय नेताओं के भाषणों में यह बार-बार कहा गया कि “एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा”, जिससे यह संदेश गया कि बड़े पैमाने पर नाम कटने वाले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में घुसपैठिए हैं, तो बीते दस वर्षों से केंद्र में और पच्चीस वर्षों से मध्यप्रदेश में सरकार भाजपा की ही है, ऐसे में जिम्मेदारी भी उन्हीं की बनती है।
जीतू पटवारी ने कहा ‘बीएलओ मानसिक दबाव में’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान सरकारी और प्रशासनिक दबाव के कारण बीएलओ मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने कहा कि “बीएलओ पर दबाव बनाया जाता है कि नाम काटो। यदि वे सही नाम भी हटाते हैं तो भविष्य में कार्रवाई की आशंका रहती है, और ऊपर से शासन का दबाव अलग है, ऐसे में वे अत्यधिक मानसिक दबाव में हैं”।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
जीतू पटवारी किया कि भोपाल और इंदौर में एसआईआर प्रक्रिया में लगभग पचास प्रतिशत गलतियां सामने आ रही हैं और कई तरह की अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग इन अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच करे और बीएलओ पर अनावश्यक दबाव को तुरंत रोके। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह सतर्क है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि किसी भी भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से न हटाया जाए। उन्होंने कहा कि जो परिस्थितियां हैं उसे लेकर हम सजग हैं और एक भी भारतीय का नाम न कटे इसे लेकर हम एकजुटता से काम कर रहे हैं।






